ईरान ने अपने दोस्त चीन को ही दे दी चोट, कुवैत में चाइनीज कंपनी पर दागीं मिसाइलें, एक की मौत

कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हुए मिसाइल हमले ने सिर्फ एक इमारत को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि ईरान और चीन जैसे करीबी साझेदारों के रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

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पश्चिम एशिया में महीनों से जारी सैन्य टकराव अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हर नया हमला नए भू-राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जवाबी कार्रवाई के बीच अब एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हुए मिसाइल हमले ने सिर्फ एक इमारत को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि ईरान और चीन जैसे करीबी साझेदारों के रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी बीच अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया है, जबकि सऊदी अरब ने भी ईरान और उसके समर्थक संगठनों को सख्त संदेश दे दिया है. इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है.

कुवैत में चीनी कंपनी पर मिसाइल हमला

कुवैत की सेना के अनुसार गुरुवार सुबह उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत ईरानी मिसाइल हमले की चपेट में आ गई. इस हमले में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और वहां मौजूद एक कर्मचारी की मौत हो गई. घटना ऐसे समय हुई जब क्षेत्र में पहले से ही मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई का दौर जारी है. इस हमले ने इसलिए भी हैरानी पैदा की क्योंकि चीन लंबे समय से ईरान का महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार माना जाता है.

जॉर्डन ने रास्ते में ही मार गिराईं पांच मिसाइलें

कुवैत की घटना से कुछ घंटे पहले जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई पांच मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया. जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के मुताबिक इन मिसाइलों के अवशेष किसी आबादी वाले इलाके में नहीं गिरे और किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली.

अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किया बड़ा हमला

ईरान की ओर से बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में अमेरिकी सेना ने भी व्यापक कार्रवाई की है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि उसने ईरान के खिलाफ हमलों का एक बड़ा अभियान पूरा किया है. इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया. बताया गया कि सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल लॉन्चिंग फैसिलिटी, ड्रोन बेस, तटीय निगरानी केंद्र और रक्षा प्रतिष्ठानों को लक्ष्य बनाकर हमले किए गए. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई जॉर्डन में स्थित उसके सैन्य अड्डे पर ईरान के पहले किए गए मिसाइल हमले के जवाब में की गई.

चीन और ईरान के रिश्तों पर उठने लगे सवाल

अब तक चीन और ईरान के संबंध रणनीतिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी पर आधारित रहे हैं. चीन ने कई मौकों पर अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया है. साथ ही उसने युद्धविराम की अपील भी की और क्षेत्र में खुद को शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिश की.

चीन ने पाकिस्तान सहित कई देशों के साथ मिलकर तनाव कम करने के प्रस्ताव भी दिए थे. इसके बावजूद कुवैत में चीनी कंपनी पर हुए हमले ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है. यदि यह हमला प्रत्यक्ष रूप से ईरानी कार्रवाई का परिणाम साबित होता है तो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक असहजता बढ़ सकती है.

रक्षा सहयोग के बीच सामने आई नई विडंबना

रक्षा क्षेत्र में चीन लंबे समय से ईरान का अहम सहयोगी रहा है. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक चीन जल्द ही ईरान को कंधे से दागी जाने वाली एयर डिफेंस मिसाइल लॉन्चर की पहली खेप भेजने की तैयारी कर रहा है. बताया जा रहा है कि कुल 400 मिसाइलों की आपूर्ति की योजना बनाई गई है ताकि ईरान अपनी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत कर सके.

सऊदी अरब ने भी दिखाई सख्ती

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष अब खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों को भी सीधे प्रभावित करने लगा है. सऊदी अरब ने हाल के दिनों में अपने तेल प्रतिष्ठानों पर हुए ड्रोन हमलों के लिए इराकी मिलिशिया समूहों को जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि कुछ संगठनों ने इन आरोपों से इनकार किया, जबकि ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने अलग संघर्ष के तहत सऊदी ऊर्जा ठिकानों पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया.

ट्रंप और जेडी वेंस से मुलाकात के बाद कड़ा संदेश

सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अलग-अलग मुलाकात की. इन बैठकों के बाद सऊदी अरब का रुख पहले से अधिक स्पष्ट दिखाई दिया. रियाद ने संकेत दिया कि यदि ईरान या उसके समर्थित संगठन सऊदी हितों को निशाना बनाते हैं तो उसका जवाब भी उसी कठोरता से दिया जाएगा. विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब की यह सक्रिय कूटनीति इस पूरे संघर्ष को नया आयाम दे सकती है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी हुई है.

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