‘सिर्फ आसमान से हमला क्यों?’ ईरान ने अमेरिका को दी जमीन पर उतरने की चुनौती, अब क्या करेंगे ट्रंप?

Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच तेहरान ने वॉशिंगटन को एक और सीधी चुनौती दी है. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा है कि अगर अमेरिका सच में युद्ध को लेकर गंभीर है तो उसे अपने सैनिक ईरान की जमीन पर उतारने चाहिए.

Iran challenges the US to put boots on the ground what will Trump do now
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Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच तेहरान ने वॉशिंगटन को एक और सीधी चुनौती दी है. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा है कि अगर अमेरिका सच में युद्ध को लेकर गंभीर है तो उसे अपने सैनिक ईरान की जमीन पर उतारने चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि अमेरिका सिर्फ आसमान से हमले क्यों कर रहा है और जमीनी सैनिकों को भेजने से क्यों बच रहा है.

रेजाई के मुताबिक, युद्ध का असली फैसला जमीन पर लड़ने वाले सैनिक करते हैं. उन्होंने पूछा कि अमेरिका अपनी हवाई ताकत का इस्तेमाल करने के बाद पीछे क्यों हट जाता है और अपने सैनिकों को ईरान में क्यों नहीं भेजता. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव जारी है, वहीं युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं. ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका तक युद्ध खत्म करने की अपनी शर्तें भी पहुंचाई हैं और अब वह अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा है.

अमेरिका जमीन पर उतरने से क्यों बचता रहा है?

ईरान एक बड़ा देश है और यहां कई इलाकों में पहाड़ हैं. ऐसे क्षेत्र में बड़ी संख्या में विदेशी सैनिक भेजना और लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाना आसान नहीं होगा. इसी वजह से ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में हवाई हमलों और दूर से किए जाने वाले हमलों की भूमिका ज्यादा रही है.

रेजाई पहले भी दावा कर चुके हैं कि अमेरिका की रणनीति में बदलाव आया है. उनका कहना है कि ईरान को आशंका है कि आगे चलकर अमेरिका जमीन पर अभियान शुरू करने की कोशिश कर सकता है. अगस्त में भी उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने संभावित जमीनी अभियान की तैयारी के तहत कुछ सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया हो सकता है.

जमीनी हमला हुआ तो बदल जाएगा जंग का रंग

अगर अमेरिकी सैनिक बड़े पैमाने पर ईरान में दाखिल होते हैं तो युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है. हवाई हमलों में किसी लक्ष्य को दूर से निशाना बनाया जा सकता है, लेकिन जमीनी लड़ाई में सैनिकों को दुश्मन के इलाके में जाना, आगे बढ़ना और लंबे समय तक अपनी सप्लाई बनाए रखना पड़ता है.

ईरान के पहाड़ी और बड़े भूगोल की वजह से यह चुनौती और बढ़ सकती है. ऐसे में रेजाई का सवाल सिर्फ अमेरिका को चुनौती देने तक सीमित नहीं है. वह यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या केवल हवाई हमलों के जरिए ईरान पर निर्णायक सैन्य दबाव बनाया जा सकता है.

ईरान भी बदल रहा युद्ध रणनीति

रेजाई का दावा है कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है और वह अमेरिकी हवाई हमलों का जवाब देने के लिए पहले से ज्यादा तैयार है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसके हितों को निशाना बनाकर जवाब दे सकता है. हालिया रिपोर्टों में भी ईरान की ओर से अमेरिका और उसके सहयोगियों के किसी नए हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

धमकी के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला

ईरान का रुख इस समय दो तरफ दिखाई दे रहा है. एक ओर तेहरान युद्ध के लिए तैयार रहने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बातचीत का रास्ता भी खुला रखा गया है. 19 सितंबर को रेजाई ने बताया था कि ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका तक युद्ध खत्म करने की अपनी शर्तें पहुंचाई हैं. इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, ईरान के फंड को फ्री करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है.

कतर और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. यानी ईरान की तरफ से एक ओर सैन्य जवाब की चेतावनी है तो दूसरी तरफ बातचीत के जरिए युद्ध खत्म करने की कोशिश भी जारी है.

‘निर्णायक युद्ध’ की भी चेतावनी

रेजाई ने कहा है कि अगर ईरान की शर्तें नहीं मानी गईं तो उनका देश निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है. उन्होंने संकेत दिया कि ईरान की जवाबी कार्रवाई सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह सकती. क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों और कंपनियों को लेकर भी चेतावनी दी गई है.

होर्मुज की वजह से बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का असर दोनों देशों से बाहर भी दिखाई दे रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव ने दुनिया के तेल और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम है. यहां लंबे समय तक किसी तरह की रुकावट से तेल की कीमतों और समुद्री कारोबार पर असर पड़ सकता है. हालिया घटनाक्रम में ईरान ने भी कहा है कि वह अपनी शर्तें पूरी होने तक होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार नहीं है.

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