Political Popcorn: भारत की 'मिसाइल कूटनीति' से लेकर कोरापुट की कॉफी तक... आज का 'पॉलिटिकल पॉपकॉर्न'

केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की बहुप्रतीक्षित फाइल पर अचानक लाल बत्ती जल गई है. आंतरिक सर्वे की गोपनीय रिपोर्ट ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें जमीनी सुस्ती और युवाओं के बीच बढ़ते अलगाव के संकेत मिले हैं.

confidential survey report special session of Parliament today Political Popcorn
Bharat 24

1.कैबिनेट विस्तार पर ब्रेक ?

क्या कहती है गोपनीय सर्वे की रिपोर्ट ?

केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की बहुप्रतीक्षित फाइल पर अचानक लाल बत्ती जल गई है. आंतरिक सर्वे की गोपनीय रिपोर्ट ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें जमीनी सुस्ती और युवाओं के बीच बढ़ते अलगाव के संकेत मिले हैं. सर्वे का सबसे कड़वा सच यह सामने आया कि ज्यादातर सांसदों की जीत उनकी अपनी परफॉर्मेंस से ज्यादा मोदी के व्यक्तिगत करिश्मे की देन है,जिसके बाद हाईकमान ने पुरानी लिस्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि अब एक नया फाइंडिंग ग्रुप पूरी स्थिति का नए सिरे से एक्स-रे करेगा. अलबत्ता पुराने चेहरों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं कि नए सांचे में किसका पत्ता कटेगा. सियासी गलियारों में यक्ष प्रश्न यही तैर रहा है कि क्या आगामी फेरबदल में केवल चेहरों का बदलाव होगा या प्रदर्शन के आधार पर सख्त सर्जरी की जाएगी? 

2.संसद का विशेष सत्र: 25 सितंबर की आहट और एजेंडे की पहेली !

संसद की बत्ती फिर जलेगी, दो दिनों के ‘शो’ का रहस्य क्या है?

मानसून सत्र के बाद अब सियासी गलियारों में सितंबर के आखिरी हफ्ते में संसद के दो दिवसीय विशेष सत्र की सुगबुगाहट तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक सरकार 25 सितंबर के आसपास दोनों सदनों की विशेष बैठक बुलाने की तैयारी में है. जहां सत्ता पक्ष इसे विधायी कामकाज और कुछ ऐतिहासिक फैसलों को आगे बढ़ाने की कवायद बता रहा है, वहीं विपक्षी खेमे ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है कि आखिर एजेंडे के लिफाफे में क्या बंद है. राजनीतिक प्रेक्षक इस संभावित सत्र को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े अहम कदमों से जोड़कर देख रहे हैं. अलबत्ता, सांसदों के पास अभी कोई औपचारिक एजेंडा नहीं पहुंचा है, जिससे कयासों का बाजार गर्म है. सेंट्रल विस्टा में यक्ष प्रश्न यही गूंज रहा है कि क्या दो दिन की यह बैठक किसी बड़े सरप्राइज की गवाह बनेगी या सिर्फ औपचारिकता पूरी होगी? सचमुच जब भी बिना पूर्व घोषणा के संसद के दरवाजे खुलते हैं तो दिल्ली की सियासत की धड़कनें अपने आप तेज हो जाती हैं !

3.यूरोप के खाली तरकश !

क्या भारतीय मिसाइलें भरेंगी पश्चिमी देशों का दम..दिल्ली की 'मिसाइल कूटनीति' पर टिकी नजरें !

यूक्रेन युद्ध के लंबे खिंचने से यूरोप के गोला-बारूद के भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं और वहां की रक्षा कंपनियां मांग पूरी करने में हांफ रही हैं. ऐसे नाजुक मोड़ पर वैश्विक रक्षा विश्लेषकों की निगाहें भारत के स्वदेशी और किफायती मिसाइल सिस्टम पर टिक गई हैं. आकाश, अस्त्र, प्रलय और नाग जैसी अत्याधुनिक मिसाइलें अब पश्चिमी दुनिया के थिंक टैंक्स के बीच चर्चा का केंद्र बन चुकी हैं. भारत जहां इसे 'मेक इन इंडिया' और 'डिफेंस एक्सपोर्ट' की ऐतिहासिक छलांग के रूप में देख रहा है, वहीं वैश्विक शक्तियां इसे एक विश्वसनीय और किफायती सप्लायर मान रही हैं. राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि नई दिल्ली से जाने वाली सप्लाई लाइन यूरोप की सुरक्षा को स्थिर करने का बड़ा जरिया बन सकती है. अलबत्ता रक्षा कूटनीति में तकनीक और रणनीतिक संतुलन का तालमेल साधना आसान नहीं होता. अब वैश्विक पटल पर यक्ष प्रश्न यह है कि क्या यूरोप पारंपरिक पश्चिमी हथियारों का मोह छोड़कर भारतीय सिस्टम पर मुहर लगाएगा? सचमुच, कभी हथियारों के लिए आयात पर निर्भर रहने वाला देश अगर यूरोप के तरकश भरने की राह पर है, तो यह कूटनीति का नया अध्याय है !

4.कोरापुट की कॉफी का ग्लोबल जलवा !

'मन की बात' से ब्रिक्स के मंच तक पहुंची पहाड़ों से निकली चुस्की !

ओडिशा की खूबसूरत पहाड़ियों में उगने वाली कोरापुट कॉफी ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय डेलिगेट्स का दिल जीत लिया है. प्रधानमंत्री द्वारा 'मन की बात' में इस कॉफी की सराहना किए जाने के बाद से इसे वैश्विक पहचान दिलाने की मुहिम तेज हुई थी. ब्रिक्स के गिफ्ट किट्स और डेलिगेट्स के मेन्यू में शामिल 'टाइगर ब्राइट' ब्रांड ने जनजातीय किसानों की मेहनत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका दिया है. करीब 5,100 हेक्टेयर में फैली खेती से हजारों आदिवासी परिवारों की सालाना आय में ₹60,000 तक का इजाफा हुआ है. सत्ता पक्ष इसे 'वोकल फॉर लोकल' की सबसे बेहतरीन मिसाल बता रहा है. राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी से जोड़ना आदिवासियों के सशक्तिकरण का सबसे व्यावहारिक मॉडल है. अलबत्ता स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन और मार्केटिंग को और मजबूत करने की दरकार है. अब प्रश्न यह है कि क्या यह मॉडल देश के बाकी पारंपरिक उत्पादों के लिए भी वैश्विक द्वार खोल पाएगा? सचमुच जब दूरदराज की माटी की खुशबू विदेशी डिप्लोमेट्स के कप तक पहुंचती है तो स्थानीय विकास का स्वाद और गहरा हो जाता है !

5.सुशासन बाबू की खिड़की पर फिर दस्तक, 'हाथ' मिलाएगा या 'तीर' कमान में ही रहेगा?

यूसीसी का बहाना या पाला बदलने का पुराना ताना-बाना?

बिहार की सियासत में 'पलटूराम' का मुहावरा एक बार फिर सियासी डाइनिंग टेबल पर परोसा जाने लगा है. कांग्रेस आलाकमान ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को गुप्त मिशन पर लगा दिया है कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके करीबी सिपहसालारों से संपर्क के तार जोड़ें. चर्चा है कि आरजेडी पहले ही जमीन तैयार कर चुकी है और अब राहुल गांधी के निर्देश पर नीतीश को दोबारा 'इंडिया' गठबंधन के पाले में लाने की बिसात बिछाई जा रही है, जहां शीर्ष स्तर पर सीधी बातचीत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं. इस पूरी सियासी कसरत के केंद्र में समान नागरिक संहिता UCC पर जेडीयू का रुख बना हुआ है, जिसे ढाल बनाकर एनडीए में दरार डालने की उम्मीदें बांधी जा रही हैं.राजनीतिक प्रेक्षक चश्मा चढ़ाकर पटना से दिल्ली तक के मौसम को भांप रहे हैं कि क्या इतिहास खुद को फिर दोहराने जा रहा है? अलबत्ता एनडीए खेमा पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा है कि इस बार गठबंधन की डोर इतनी कमजोर नहीं है कि बयानों की हवा से टूट जाए !

ये भी पढ़ें- युवाओं के लिए बड़ा दिन! आज 51 हजार को मिलेगी सरकारी नौकरी, PM मोदी सौंपेंगे नियुक्ति पत्र