Nasrallah missile: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए. इस हमले की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पहली बार नई ‘नसरल्लाह’ बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया. बताया जा रहा है कि इस हमले में इज़राइल के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
ईरान ने इस नई मिसाइल का नाम हिज़्बुल्लाह के पूर्व नेता हसन नसरल्लाह के नाम पर रखा है. इसे प्रतीकात्मक जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि यह मिसाइल ईरान की पुरानी Qadr (Ghadr) सीरीज का उन्नत संस्करण है, जिसे आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है.
क्या है इस मिसाइल की खासियत?
नसरल्लाह मिसाइल को खास तौर पर हाई-वैल्यू टारगेट्स को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें एक साथ कई वारहेड ले जाने की क्षमता बताई जा रही है, जिससे यह एक ही समय में कई ठिकानों पर हमला कर सकती है या किसी मजबूत लक्ष्य को भेद सकती है.
इसकी गाइडेंस तकनीक पहले की मिसाइलों से ज्यादा सटीक मानी जा रही है. यह मिसाइल ऑयल रिफाइनरी, एयरबेस और कमांड सेंटर जैसे अहम ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम बताई जा रही है.
रेंज और स्पीड ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मिसाइल की रेंज करीब 1500 से 2000 किलोमीटर या उससे ज्यादा हो सकती है. इसका मतलब है कि ईरान से इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी ठिकाने इसकी जद में आ सकते हैं.
इसके अलावा, यह एक बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी गति Mach 5 या उससे अधिक बताई जा रही है. इतनी तेज रफ्तार के कारण इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है, जिससे यह एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बन सकती है.
मल्टी-अटैक रणनीति का हिस्सा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल को अकेले इस्तेमाल करने के बजाय ड्रोन और अन्य मिसाइलों के साथ मिलाकर दागा जा सकता है. इससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ता है और उसे ओवरलोड करना आसान हो जाता है.
ऊर्जा ठिकानों पर हमले से बढ़ा खतरा
इस हमले में ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. मध्य पूर्व दुनिया के बड़े तेल और गैस भंडारों का केंद्र है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है.
ईरान की सैन्य क्षमता पर उठे सवाल और जवाब
अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद यह सवाल उठ रहे थे कि क्या ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई है. हालांकि लगातार मिसाइल हमलों और नई तकनीक के इस्तेमाल से यह संकेत मिल रहा है कि ईरान की मिसाइल उत्पादन और ऑपरेशनल क्षमता अभी भी सक्रिय है.
बताया जा रहा है कि ईरान के पास मोबाइल लॉन्चर और भूमिगत सुविधाएं हैं, जो उसकी सैन्य ताकत को बनाए रखने में मदद कर रही हैं.
इज़राइल की ओर से पहले दावा किया गया था कि ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया गया है. लेकिन लगातार हो रहे हमले और नई मिसाइल का इस्तेमाल इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है.
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