शांति वार्ता के लिए मान गया ईरान! खामेनेई ने डेलिगेशन भेजने की दी मंजूरी, वेंस भी जाएंगे इस्लामाबाद

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब कूटनीतिक स्तर पर समाधान निकालने की कोशिशें तेज हो गई हैं. दोनों देशों के बीच टकराव को कम करने के लिए बातचीत की तैयारी चल रही है.

Iran agreed to peace talks Khamenei approved sending delegation
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब कूटनीतिक स्तर पर समाधान निकालने की कोशिशें तेज हो गई हैं. दोनों देशों के बीच टकराव को कम करने के लिए बातचीत की तैयारी चल रही है. इसी कड़ी में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान दौरे की संभावना जताई जा रही है, जहां इस्लामाबाद में शांति वार्ता हो सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, जेडी वेंस मंगलवार सुबह (भारतीय समय के अनुसार शाम) इस्लामाबाद के लिए रवाना हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि व्हाइट हाउस सोमवार तक इस इंतजार में रहा कि ईरान बातचीत के लिए अपनी टीम भेजेगा या नहीं.

ईरान के भीतर मतभेद, फिर भी बनी सहमति

जानकारी के अनुसार, ईरान के भीतर इस मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आए थे. खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) का रुख सख्त था. उनका मानना था कि जब तक अमेरिका अपनी पाबंदियां नहीं हटाता, तब तक बातचीत नहीं होनी चाहिए.

इसके बावजूद पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों ने मध्यस्थता करते हुए ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने की कोशिश की.

आखिरकार सोमवार रात ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने प्रतिनिधिमंडल भेजने की मंजूरी दे दी. इस फैसले के बाद वार्ता का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है.

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में बड़े नाम शामिल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संभावित वार्ता में जेडी वेंस के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हो सकते हैं.

अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो बुधवार को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम बैठक हो सकती है, जिसमें तनाव कम करने और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी.

सीजफायर की समयसीमा बनी बड़ी चुनौती

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से लागू दो सप्ताह का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने कम समय में पूरा समझौता होना मुश्किल है.

फिर भी अगर बातचीत में सकारात्मक प्रगति होती है, तो सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है, जिससे वार्ता को और समय मिल सके.

सीजफायर को लेकर अलग-अलग दावे

सीजफायर को लेकर अलग-अलग तरह की खबरें सामने आ रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, जिससे हालात फिर से बिगड़ सकते हैं.

वहीं, ईरान ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि वह बैठक में शामिल होगा, लेकिन उसने मध्यस्थ देशों को संकेत दिया है कि वह अपनी टीम भेज सकता है.

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बातचीत में प्रगति होती है, तो सीजफायर को दो सप्ताह और बढ़ाया जा सकता है.

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