नई दिल्ली: मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों और खासकर भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर भारतीय नाविकों पर किसी भी तरह के हमले को लेकर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने साफ कहा कि क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'आज शाम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत हुई. क्षेत्र में जारी तनाव और हमलों को लेकर हमने अपनी गहरी चिंता जताई है. जोर देकर कहा कि किसी भी हाल में कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों पर हमले नहीं होने चाहिए. भारत किसी भी पक्ष द्वारा किए गए ऐसे किसी भी हमले की निंदा करता है. मौजूदा हालात और चल रही बातचीत पर ईरान का नजारिया भी जाना. भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता है.'
Had a tele-conversation with FM @araghchi of Iran this evening. Conveyed our deep concerns at the ongoing hostilities in the region.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 31, 2026
Strongly urged that attacks on commercial shipping and seafarers be avoided under any circumstance. India condemns any such attack by any party.…
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता
भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने अहमद अल जाबेर एयर बेस को ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई ऑपरेशन 'लाइटनिंग' के 27वें चरण के तहत की गई. तेहरान का कहना है कि यह हमला केसम द्वीप पर एक रिहायशी घर पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया, जिसमें सैन्य ढांचे से जुड़े एयरक्राफ्ट शेल्टर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और उपकरण भंडारण केंद्र को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया था.
भारत की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और पेशेवर कार्यरत हैं. ऐसे में भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर सभी संबंधित देशों के संपर्क में है. विदेश मंत्री जयशंकर की यह बातचीत भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि क्षेत्रीय संघर्ष चाहे जितना भी गंभीर क्यों न हो, भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
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