Vaibhav Sooryavanshi Batting: भारतीय क्रिकेट में जब कोई युवा खिलाड़ी तेजी से अपनी पहचान बनाता है, तो उसकी खूबियों के साथ उसकी कमजोरियों पर भी नजर जाने लगती है. वैभव सूर्यवंशी ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और शानदार स्ट्राइक रेट से क्रिकेट जगत में खूब चर्चा बटोरी है. जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज में उन्होंने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उससे साफ हो गया कि उनमें बड़े स्तर पर खेलने की क्षमता है.
लेकिन इस शानदार शुरुआत के बीच उनकी एक कमजोरी भी सामने आई है. वह कमजोरी है तेज गेंदबाजों की शॉर्ट बॉल यानी बाउंसर. अगर वैभव ने समय रहते इस पर काम नहीं किया, तो आने वाले समय में विरोधी टीमें इसे उनके खिलाफ बड़ा हथियार बना सकती हैं.
जिम्बाब्वे के खिलाफ दिखा वैभव का तूफानी अंदाज
जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया. हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए इस मुकाबले में उन्होंने तेज गेंदबाज रिचर्ड नगारवा के एक ओवर में जमकर रन बनाए.
ओवर की शुरुआत में ही वैभव ने लगातार बड़े शॉट लगाए. उन्होंने 4, 6, 4 और 4 रन बटोरकर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया. सिर्फ 9 गेंदों में उन्होंने 3 चौके और 1 छक्के की मदद से 20 रन बना लिए थे. उनकी बल्लेबाजी देखकर ऐसा लग रहा था कि वह एक बार फिर बड़ी पारी खेलने वाले हैं, लेकिन तभी गेंदबाज ने अपनी रणनीति बदल दी.
शॉर्ट बॉल ने रोक दी वैभव की रफ्तार
रिचर्ड नगारवा ने आखिरी गेंद पर वैभव की कमजोरी को पहचानते हुए शरीर की तरफ तेज शॉर्ट बॉल फेंकी. वैभव ने बिना गेंद की उछाल को पूरी तरह समझे आक्रामक पुल शॉट खेलने की कोशिश की.
लेकिन गेंद बल्ले के ऊपरी हिस्से पर लगी और हवा में चली गई. मिड-ऑन पर खड़े ब्लेसिंग मुजारबानी ने शानदार कैच लेकर वैभव की पारी खत्म कर दी. यह विकेट सिर्फ एक आउट नहीं था, बल्कि विरोधी टीमों के लिए एक संकेत भी था कि वैभव के खिलाफ किस तरह की रणनीति अपनाई जा सकती है.
आक्रामक खेल उनकी ताकत, लेकिन संयम भी जरूरी
वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर अंदाज है. वह गेंदबाजों से डरने के बजाय उन पर हमला करना पसंद करते हैं. पहले टी20 मैच में भी उन्होंने सिर्फ 19 गेंदों में अर्धशतक लगाकर अपनी क्षमता दिखाई थी. इतनी कम उम्र में इस तरह का आत्मविश्वास उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है.
लेकिन टी20 क्रिकेट में सिर्फ आक्रामकता ही काफी नहीं होती. बड़े खिलाड़ियों की पहचान यह होती है कि वे सही समय पर आक्रमण और बचाव के बीच संतुलन बनाते हैं. शॉर्ट बॉल के खिलाफ बल्लेबाज को सिर्फ ताकत नहीं बल्कि सही टाइमिंग, फुटवर्क और शॉट का चुनाव भी जरूरी होता है.
विरोधी टीमें अब बाउंसर से बना सकती हैं प्लान
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर खिलाड़ी की बल्लेबाजी का बारीकी से अध्ययन किया जाता है. गेंदबाज और कोच वीडियो देखकर बल्लेबाज की कमजोरियां तलाशते हैं. वैभव के मामले में भी ऐसा ही होगा. अगर वह आगे बढ़कर या फुल लेंथ की गेंदों पर खेलते हैं तो वह गेंदबाजों पर भारी पड़ सकते हैं. इसलिए तेज गेंदबाज उन्हें शरीर की तरफ शॉर्ट गेंद डालकर परेशानी में डालने की कोशिश करेंगे.
बाउंसर के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि बल्लेबाज को बहुत कम समय में फैसला लेना पड़ता है. अगर बल्लेबाज हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश करता है तो गलती होने की संभावना बढ़ जाती है.
वैभव को किन चीजों पर करना होगा काम?
वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं और उनके पास अपनी तकनीक सुधारने के लिए काफी समय है. उनकी बल्लेबाजी में बदलाव धीरे-धीरे आएंगे. उन्हें शॉर्ट गेंदों के खिलाफ कुछ बातों पर ध्यान देना होगा. हर बाउंसर को सीमा रेखा के बाहर भेजना जरूरी नहीं है. कई बार गेंद को छोड़ना या नीचे झुककर बचना भी अच्छी बल्लेबाजी का हिस्सा होता है.
उन्हें बैकफुट पर सही स्थिति बनाकर शॉट खेलने की आदत डालनी होगी. साथ ही पुल शॉट खेलते समय गेंद को जमीन के साथ रखने की कोशिश करनी होगी, ताकि कैच होने का खतरा कम हो. रोहित शर्मा जैसे बड़े बल्लेबाज भी पुल शॉट खेलते हैं, लेकिन वह गेंद की गति और उछाल को समझकर शॉट लगाते हैं. वैभव को भी इसी तरह धैर्य और नियंत्रण के साथ खेलना सीखना होगा.
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