PM Modi Visit TEL Miyagi: भारत और जापान के बीच सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण तकनीकी क्षेत्र में एक नई साझेदारी की शुरुआत हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने आज मियागी प्रीफेक्चर के सेन्दाई स्थित टोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड (TEL Miyagi) का दौरा किया, जो जापान की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनी है. यह दौरा दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, खासकर तब जब दुनिया भर में सेमीकंडक्टर चिप्स की मांग और उत्पादन में तेजी से वृद्धि हो रही है.
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरे के दौरान जापान और भारत की पूरी तरह से पूरक क्षमताओं पर जोर दिया. जहां भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अपनी स्थापना और इकोसिस्टम को तेजी से विकसित कर रहा है, वहीं जापान के पास उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं. यह संयुक्त सहयोग दोनों देशों के लिए न केवल आर्थिक लाभ बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर चिप्स की आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत कर सकता है.
石破首相と東京エレクトロンの工場を訪問しました。研修室や生産イノベーションラボを視察し、同社の幹部とも意見交換を行いました。半導体は印日協力の重要な分野です。… pic.twitter.com/fzphNh9dJq
— Narendra Modi (@narendramodi) August 30, 2025
समझौतों और साझेदारियों पर जोर
इस दौरान दोनों नेताओं ने जापान-भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पार्टनरशिप पर सहमति व्यक्त की, और इंडिया-जापान इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस पार्टनरशिप एवं इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग जैसी मौजूदा साझेदारियों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया. यह क़दम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक सहयोग को और भी मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, विशेषकर वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में.
सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में लचीलापन और सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल को भारत-जापान सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया और जापान के प्रधानमंत्री इशिबा का आभार व्यक्त करते हुए भारत की ओर से करीब सहयोग का आश्वासन दिया. यह सहयोग भारत और जापान दोनों के लिए एक मजबूत, लचीली और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की नींव रखेगा, जो भविष्य में तकनीकी सुरक्षा और आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.
दौरे का महत्व और वैश्विक संदर्भ
इस दौरे का महत्व केवल दो देशों के बीच तकनीकी साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सेमीकंडक्टर संकट को हल करने में भी एक अहम कदम हो सकता है. भारत के तेजी से बढ़ते बाजार और जापान की उन्नत तकनीक इसे एक सशक्त आर्थिक समझौता बना सकते हैं, जो दोनों देशों के वैश्विक व्यापार को नई दिशा दे सकता है.
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