वॉशिंगटन: आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान को बड़ी राहत मिली है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान के लिए 1.2 अरब डॉलर के बेलआउट फंड को मंजूरी देने की घोषणा की है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश महंगाई, ऊर्जा संकट और कमजोर आर्थिक स्थिति से जूझ रहा है.
पाकिस्तान में महंगाई दर 22 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित है. तेल और गैस की कमी ने भी देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला है. ऐसे हालात में IMF से मिलने वाला यह फंड पाकिस्तान के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
पहले हुआ था स्टाफ-लेवल समझौता
पिछले महीने पाकिस्तान और IMF के बीच लगभग 1.2 अरब डॉलर की राशि जारी करने को लेकर स्टाफ-लेवल एग्रीमेंट (SLA) हुआ था. यह समझौता दो प्रमुख व्यवस्थाओं—एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) और रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF)—के तहत हुआ.
IMF ने 28 मार्च 2026 को जानकारी दी थी कि दोनों कार्यक्रमों के तहत समीक्षा प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है, जिसके बाद फंड जारी करने का रास्ता साफ हुआ.
7 अरब डॉलर के पैकेज का हिस्सा
यह 1.2 अरब डॉलर की राशि पाकिस्तान के लिए पहले से स्वीकृत 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज का हिस्सा है. इस पैकेज को अलग-अलग किश्तों में जारी किया जाना है और इसके लिए पाकिस्तान को IMF की शर्तों का पालन करना जरूरी है.
BREAKING: Pakistan set to receive $1.2 billion more in bailout funds from the International Monetary Fund pic.twitter.com/BWRh5R1xje
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) April 18, 2026
IMF की शर्तें और सुधार
IMF ने पाकिस्तान से कई आर्थिक सुधारों की मांग की थी. इनमें टैक्स बेस को बढ़ाना, खासकर कृषि, आईटी और रिटेल सेक्टर को टैक्स के दायरे में लाना शामिल है. इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया.
इन शर्तों के चलते पाकिस्तान को बिजली दरों में बढ़ोतरी जैसे कठिन फैसले लेने पड़े हैं, जिससे आम जनता पर असर पड़ा है.
बातचीत का लंबा दौर
IMF का प्रतिनिधिमंडल फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में कराची और इस्लामाबाद गया था, जहां पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत हुई. हालांकि उस समय कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका था और बाद में यह बातचीत वर्चुअल माध्यम से जारी रही.
आखिरकार दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद अब फंड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है.
अन्य आर्थिक मदद भी मिली
पाकिस्तान को हाल ही में सऊदी अरब से भी 2 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिली है. पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के अनुसार यह राशि उसके खाते में जमा हो चुकी है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार को कुछ मजबूती मिली है.
अमेरिका की भूमिका क्यों अहम?
IMF में अमेरिका का प्रभाव काफी ज्यादा है. उसके पास करीब 16.5% वोटिंग शेयर है और कई महत्वपूर्ण फैसलों में उसका रुख निर्णायक माना जाता है. यही वजह है कि पाकिस्तान को मिलने वाले इस फंड के पीछे अमेरिकी समर्थन को अहम माना जा रहा है.
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका IMF के जरिए अपने रणनीतिक हितों को भी साधता है, हालांकि आधिकारिक तौर पर फंडिंग निर्णय आर्थिक मानदंडों के आधार पर ही लिए जाते हैं.
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