भारत सरकार ने बांग्लादेश को दिया झटका और इन देशों की भरी झोली, पड़ोसियों के लिए कैसा रहा बजट 2026?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया.

How was Indian Budget 2026 for its neighbours Bangladesh Maldives
Image Source: Social Media

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया. इस बजट में जहां घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के कई प्रावधान किए गए, वहीं विदेश नीति के तहत भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” यानी “पड़ोसी पहले” रणनीति को भी नए सिरे से परिभाषित किया गया है.

बजट 2026-27 में विदेश मंत्रालय (MEA) के लिए कुल आवंटन बढ़ाकर 22,118.97 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 20,516.61 करोड़ रुपये से अधिक है. इस बढ़ोतरी के साथ भारत ने अपने पड़ोसी और मित्र देशों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी कई अहम बदलाव किए हैं. कुछ देशों के लिए मदद बढ़ाई गई है, जबकि कुछ को मिलने वाली सहायता में कटौती की गई है.

बांग्लादेश को आधी रह गई मदद

इस साल के बजट में सबसे बड़ा बदलाव बांग्लादेश के लिए की गई वित्तीय सहायता में देखने को मिला है. भारत ने बांग्लादेश के लिए आवंटित राशि को पिछले साल के 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया है.

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के रिश्तों में राजनीतिक बदलावों के बाद तनाव देखने को मिला है. हाल के घटनाक्रमों के चलते द्विपक्षीय संबंधों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही. गौर करने वाली बात यह भी है कि पिछले साल बांग्लादेश के लिए निर्धारित 120 करोड़ रुपये में से केवल 34 करोड़ रुपये का ही उपयोग हो पाया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार अपेक्षा से कम रही.

मालदीव के लिए सहायता में कटौती

भारत ने मालदीव के लिए आर्थिक सहायता में भी कमी की है. बजट 2026-27 में मालदीव को 550 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रावधान किया गया है, लेकिन यह राशि पिछले साल की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत कम है.

हाल के वर्षों में भारत और मालदीव के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय समीकरणों का असर द्विपक्षीय सहयोग पर भी पड़ा है. ऐसे में सहायता राशि में कटौती को रणनीतिक संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है.

भूटान को मिला सबसे ज्यादा लाभ

भारत ने अपने सबसे भरोसेमंद पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार भूटान के लिए वित्तीय सहायता में बड़ा इजाफा किया है. बजट 2026-27 में भूटान को 2,288.55 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया गया है.

भारत और भूटान के रिश्ते दशकों से मजबूत रहे हैं, खासतौर पर जलविद्युत परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र में. भूटान में बनने वाली कई जलविद्युत परियोजनाओं में भारत की भूमिका अहम रही है, जिससे दोनों देशों को ऊर्जा और आर्थिक लाभ मिलता है. बढ़ा हुआ बजट इस बात का संकेत है कि भारत इस साझेदारी को आगे और मजबूत करना चाहता है.

अफगानिस्तान के लिए मानवीय मदद में बढ़ोतरी

अफगानिस्तान के लिए भारत की सहायता राशि को भी बढ़ाया गया है. पिछले साल 50 करोड़ रुपये की सहायता के मुकाबले इस बार 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

भारत लंबे समय से अफगानिस्तान में मानवीय सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़े प्रोजेक्ट्स में सहयोग करता रहा है. मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने मानवीय आधार पर अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है. यह कदम अफगान नागरिकों के लिए राहत और पुनर्निर्माण प्रयासों में मददगार माना जा रहा है.

नेपाल और श्रीलंका को अतिरिक्त समर्थन

नेपाल के लिए भारत ने सहायता राशि बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछले साल से 100 करोड़ रुपये अधिक है. नेपाल के साथ भारत के संबंध व्यापार, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं.

वहीं श्रीलंका के लिए भी वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये किया गया है, जो पहले से 100 करोड़ रुपये ज्यादा है. हाल ही में श्रीलंका में आए तूफान और प्राकृतिक आपदाओं के बाद भारत ने राहत सामग्री और आर्थिक सहायता भेजी थी. ऐसे में बजट में की गई यह बढ़ोतरी श्रीलंका की अर्थव्यवस्था और पुनर्वास प्रयासों को समर्थन देने के तौर पर देखी जा रही है.

मंगोलिया और मॉरिशस के लिए बड़ा उछाल

बजट में मंगोलिया के लिए सहायता राशि को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह कदम भारत की “एक्ट ईस्ट” और मध्य एशिया से जुड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

इसके अलावा मॉरिशस के लिए सहायता राशि में भी बड़ा इजाफा हुआ है. मॉरिशस को इस साल 550 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल के 50 करोड़ रुपये की तुलना में कई गुना अधिक है. हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने में मॉरिशस की भूमिका अहम मानी जाती है.

सेशेल्स और म्यांमार को स्थिर सहायता

सेशेल्स के लिए भारत ने इस साल भी 19 करोड़ रुपये का बजट रखा है, जो पिछले साल के बराबर है. वहीं म्यांमार के लिए 300 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता तय की गई है. म्यांमार में जारी राजनीतिक और मानवीय संकट के बीच भारत की यह मदद क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय सहायता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.