Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने पर्यटन को देश की आर्थिक वृद्धि का बड़ा इंजन बनाने की दिशा में कई अहम घोषणाएं की हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा कि भारत को ऑल-सीजन डेस्टिनेशन और वैश्विक स्तर का टूरिस्ट हब बनाने के लिए देश के 50 शहरों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के अनुकूल तैयार किया जाएगा.
इस योजना के तहत इन शहरों में वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, स्वच्छता, सुरक्षा, डिजिटल सुविधाएं और पर्यटक-अनुकूल सेवाओं को विकसित किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ बड़े शहरों पर दबाव कम होगा, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलेगी.
पर्यटन बजट में बढ़ोतरी, 2,438 करोड़ का प्रावधान
बजट 2026-27 में पर्यटन मंत्रालय के लिए 2,438.40 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. सरकार ने दीर्घकालिक लक्ष्य तय करते हुए कहा है कि 2047 तक भारत में सालाना 10 करोड़ विदेशी पर्यटक लाने की दिशा में काम किया जाएगा.
आकलन के मुताबिक, अगर यह लक्ष्य हासिल होता है तो 2034 तक पर्यटन क्षेत्र का योगदान भारत की जीडीपी में करीब 43.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. पर्यटन सेक्टर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 6.3 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की क्षमता बताई गई है.
पर्यटन मंत्रालय की ‘इंडिया टूरिज्म स्टैटिस्टिक्स’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में हर साल करीब 1 करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं. इनमें से लगभग 6 से 7 प्रतिशत बौद्ध पर्यटक होते हैं. पिछले वर्ष करीब 7.10 लाख बौद्ध पर्यटक भारत आए थे, जिससे बौद्ध सर्किट और धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं.
पूर्वोत्तर और बौद्ध सर्किट पर खास ध्यान
बजट 2026 में पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए 6,812 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है. इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट विकसित किए जाएंगे.
सरकार का उद्देश्य है कि बौद्ध तीर्थ स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी, सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं से जोड़ा जाए, ताकि एशियाई देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सके.
मंदिरों और धार्मिक शहरों का इंटरनेशनल अपग्रेड
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश के प्रमुख मंदिरों और तीर्थ स्थलों वाले शहरों में बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा.
उत्तर भारत में वाराणसी, मथुरा, जम्मू, ऋषिकेश और हरिद्वार पर फोकस रहेगा. दक्षिण भारत में मदुरै, कांचीपुरम, हम्पी, तिरुपति, भुवनेश्वर और पुरी जैसे शहरों को पर्यटन के लिहाज से अपग्रेड किया जाएगा. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के बिश्नुपुर, मध्य प्रदेश के उज्जैन और खजुराहो, गुजरात के द्वारका और महाराष्ट्र के पंढरपुर को भी इस योजना में शामिल किया गया है.
इन शहरों में ठहरने की सुविधा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, गाइड सेवाएं, डिजिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
पर्यटन स्थलों का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा
नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड के तहत भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों का व्यापक डिजिटल डेटा तैयार किया जाएगा. इसमें ऐतिहासिक जानकारी, यात्रा मार्ग, होटल, स्थानीय सेवाएं और अनुभव आधारित कंटेंट शामिल होगा.
इस पहल से विदेशी पर्यटकों को यात्रा की योजना बनाने में आसानी होगी. साथ ही स्थानीय शोधार्थियों, इतिहासकारों, कंटेंट क्रिएटर्स, टूर गाइड्स, होटल व्यवसाय, ट्रांसपोर्ट सर्विस, होम-स्टे और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
ऑल-सीजन टूरिज्म के लिए स्किल डेवलपमेंट
पर्यटन को सालभर चलने वाली गतिविधि बनाने के लिए मानव संसाधन पर भी निवेश किया जाएगा. देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूर गाइड्स को IIM के माध्यम से 12 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा.
इसके अलावा, एयरपोर्ट्स पर लगेज हैंडलिंग से जुड़े नियमों को सरल किया जाएगा और कुशल स्टाफ तैयार करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना की जाएगी. इससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में प्रोफेशनल ट्रेनिंग को बढ़ावा मिलेगा.
सीप्लेन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा
सरकार ने जल-विमान (सीप्लेन) सेवाओं को बढ़ावा देने की योजना बनाई है. अब सीप्लेन का निर्माण देश में ही किया जाएगा और इनके संचालन के लिए सब्सिडी दी जाएगी. इसके लिए सीप्लेन VGF योजना शुरू की जाएगी.
इस पहल से द्वीपीय और दूरदराज क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी और पर्यटन के नए रूट खुलेंगे.
15 पुरातात्विक स्थल बनेंगे कल्चरल डेस्टिनेशन
देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को ‘एक्सपीरियंशियल कल्चरल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जाएगा. इनमें लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, लेह पैलेस, आदिचनल्लूर और हस्तिनापुर जैसे स्थल शामिल हैं.
इन स्थलों पर वॉकवे, इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और आधुनिक प्रदर्शनी तकनीकों के जरिए पर्यटकों को इतिहास को जीवंत रूप में अनुभव करने का मौका मिलेगा.
भारत में होगी ग्लोबल बिग कैट समिट
इसी साल भारत में पहली बार “ग्लोबल बिग कैट समिट” आयोजित की जाएगी. भारत ने 2024 में इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस की स्थापना की थी. इस मंच पर बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा जैसे बड़े वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी.
करीब 95 देशों के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में हिस्सा लेकर वन्यजीव संरक्षण के साझा प्रयासों पर चर्चा करेंगे. इससे ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
एडवेंचर और इको-टूरिज्म से ब्रांडिंग
एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में माउंटेन ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे. पूर्वी घाट के अरकू वैली और पश्चिमी घाट के पोधीगई मलई में भी ट्रैकिंग रूट्स बनाए जाएंगे.
ओडिशा, कर्नाटक और केरल में टर्टल ट्रेल्स विकसित होंगे, जबकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स तैयार किए जाएंगे. इन टिकाऊ पर्यटन मॉडलों के जरिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर मिलेंगे.
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