नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत लगातार अपनी रक्षा तकनीक और समुद्री क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है. इसी कड़ी में अब हाइपरसोनिक LR-AShM मिसाइल ने सुर्खियाँ बटोर ली हैं. यह मिसाइल न सिर्फ ब्रह्मोस से तेज और खतरनाक है, बल्कि इसकी रफ्तार और मारक क्षमता इसे समुद्री युद्ध में गेम चेंजर बना देती है. जर्मनी के रक्षा विशेषज्ञ थॉमस न्यूडिक के अनुसार, LR-AShM की हाइपरसोनिक गति इसे अत्यधिक घातक बनाती है और यह किसी भी रक्षा प्रणाली के लिए चुनौती पेश करती है.
हाइपरसोनिक LR-AShM की विशेषताएं
LR-AShM की ताकत सिर्फ उसके वारहेड में नहीं है, बल्कि इसमें मौजूद काइनेटिक एनर्जी इसे और खतरनाक बनाती है. इसकी गति इतनी तेज है कि यह किसी जहाज की पतवार या सुरक्षा ढांचे को भेद सकती है, इससे पहले कि वह कोई वार कर सके. LR-AShM की रफ्तार आवाज की गति से कई गुना अधिक है, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को संभलने का समय भी नहीं मिलता.
सबसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों की तुलना में, हाइपरसोनिक मिसाइलों के पास दुश्मन को प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ सेकंड का समय होता है. इसका मतलब यह है कि जहाज पर लगे रडार, वायु रक्षा बैटरी और नजदीकी हथियार प्रणालियों (CIWS) के पास LR-AShM का पता लगाने, उसका पीछा करने और उसे रोकने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता.
ब्रह्मोस से बेहतर प्रदर्शन
थॉमस न्यूडिक की तुलना के मुताबिक, LR-AShM ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से कहीं अधिक सामरिक रूप से श्रेष्ठ है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक सीमा में काम करती है और इसकी मारक क्षमता अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण नियमों के कारण 300 किलोमीटर तक सीमित थी. जबकि भारत इसके उन्नत संस्करणों पर काम कर रहा है, LR-AShM अपनी हाइपरसोनिक डिजाइन के कारण अधिक दूर तक और अधिक प्रभावी ढंग से लक्ष्य को भेद सकती है.
लंबी दूरी और रणनीतिक श्रेष्ठता
77वें गणतंत्र दिवस परेड में LR-AShM को प्रदर्शित किया गया, जिसमें इसकी मारक क्षमता लगभग 1,500 किलोमीटर बताई गई. इस दूरी के साथ यह मिसाइल भूमि आधारित मोबाइल लॉन्चर, वायु या पोत आधारित प्लेटफॉर्म से दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने में सक्षम है. यह दूरी अधिकांश शत्रु नौसैनिक वायु रक्षा प्रणालियों के मारक क्षेत्र से बहुत बाहर है, जिससे LR-AShM रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन जाती है.
भविष्य की नौसैनिक शक्ति
हाइपरसोनिक LR-AShM मिसाइल भारत की नौसेना को एक नया आयाम देगी. इसकी गति, काइनेटिक शक्ति और लंबी मारक क्षमता इसे किसी भी समुद्री संघर्ष में निर्णायक बना सकती है. भविष्य में वायु और पोत आधारित संस्करण भी इसे और अधिक सक्षम बनाएंगे, जिससे भारत की सामरिक शक्ति और समुद्री सुरक्षा को मजबूती मिलेगी.
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