पिता बीमार, दवाइयों के लिए पैसों की कमी... कैसे TCS के 'कॉर्पोरेट जिहाद' का शिकार होती रही युवती?

महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के एक दफ्तर से जुड़े मामले ने तूल पकड़ लिया है.

How the girl became a victim of TCS corporate jihad nashik harassment
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महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के एक दफ्तर से जुड़े मामले ने तूल पकड़ लिया है. यहां कुछ महिला कर्मचारियों ने मानसिक उत्पीड़न, दबाव और अनुचित व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. मामले की जांच अब कई स्तरों पर की जा रही है और इसमें कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं.

परिवार की मजबूरी में सहना पड़ा दबाव

जांच में सामने आया कि एक पीड़िता अपने परिवार की गंभीर आर्थिक स्थिति के चलते लंबे समय तक कथित उत्पीड़न झेलती रही. उसके पिता कैंसर से पीड़ित थे और इलाज के लिए लगातार पैसों की जरूरत थी. घर की जिम्मेदारी और आर्थिक तंगी के कारण उसने नौकरी छोड़ने के बजाय परिस्थितियों को सहना बेहतर समझा.

एक अन्य महिला कर्मचारी ने भी बताया कि परिवार की जिम्मेदारी के चलते वह नौकरी नहीं छोड़ सकी और उस पर लगातार दबाव बनाया जाता रहा. पीड़िताओं के अनुसार, उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और कई बार अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा.

राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम ने किया निरीक्षण

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने नासिक में अपनी टीम भेजी. टीम ने कंपनी के दफ्तर का निरीक्षण किया और करीब डेढ़ घंटे तक वहां की कार्यप्रणाली, बैठने की व्यवस्था, विभिन्न विभागों, कैंटीन और वेटिंग एरिया का जायजा लिया.

जांच अभी जारी है और आयोग लगातार तीसरे दिन भी तथ्यों को जुटाने में लगा हुआ है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके.

कई FIR दर्ज, मुख्य आरोपी की तलाश

इस मामले में अब तक कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. मुख्य आरोपी के रूप में सामने आई निदा खान फिलहाल फरार बताई जा रही हैं और उनकी तलाश के लिए पुलिस अभियान चला रही है. उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई भी होनी है, जिसमें उनकी ओर से गर्भावस्था का हवाला दिया गया है.

मानवाधिकार आयोग ने भी मांगी रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है. आयोग ने महाराष्ट्र पुलिस और कंपनी प्रबंधन से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

जांच एजेंसियों का कहना है कि पीड़िताओं को सोशल मीडिया के जरिए भी परेशान किए जाने के संकेत मिले हैं. डिजिटल साक्ष्य इस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

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