NSG-SPG से कितनी अलग है ट्रंप की सुरक्षा करने वाली सीक्रेट सर्विस, कैसी होती है इनकी ट्रेनिंग?

अमेरिका में राष्ट्रपति की सुरक्षा संभालने वाली यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस एक बेहद खास एजेंसी है, जिसकी भूमिका और काम करने का तरीका भारत की स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड से अलग है.

How different is the secret service protecting Trump from NSG-SPG
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नई दिल्ली: अमेरिका में राष्ट्रपति की सुरक्षा संभालने वाली यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस एक बेहद खास एजेंसी है, जिसकी भूमिका और काम करने का तरीका भारत की स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड से अलग है. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यक्रम के दौरान सामने आई सुरक्षा घटना ने एक बार फिर इस एजेंसी की कार्यशैली और ट्रेनिंग को चर्चा में ला दिया है.

वॉशिंगटन DC के हिल्टन होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब एक संदिग्ध हथियार के साथ सुरक्षा घेरे के करीब पहुंचा, तो सीक्रेट सर्विस एजेंट्स ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया. खतरे का आभास होते ही काउंटर असॉल्ट टीम (CAT) सक्रिय हो गई और राष्ट्रपति को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.

इस टीम का प्राथमिक उद्देश्य होता है- राष्ट्रपति को खतरे से तुरंत दूर करना और फिर स्थिति को नियंत्रित करना. इसके बाद तय किया जाता है कि राष्ट्रपति को सुरक्षित कमरे (होल्ड रूम) में ले जाया जाए या तुरंत वाहन के जरिए वहां से निकाला जाए.

क्या होती है ‘होल्ड रूम’ और ‘हार्ड टारगेट’ की रणनीति?

अमेरिका में राष्ट्रपति जहां भी जाते हैं, वहां पहले से एक ‘होल्ड रूम’ तय किया जाता है. यह एक सुरक्षित स्थान होता है, जहां आपात स्थिति में उन्हें अस्थायी तौर पर रखा जा सकता है.

पूरा कार्यक्रम स्थल एक ‘हार्ड टारगेट’ के रूप में तैयार किया जाता है, यानी वहां सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम होते हैं. हालांकि, इसके बाहर के इलाके ‘सॉफ्ट टारगेट’ माने जाते हैं, जहां जोखिम ज्यादा होता है और एजेंसियां वहां भी नजर बनाए रखती हैं.

सीक्रेट सर्विस की शुरुआत कैसे हुई?

यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस की स्थापना 1865 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के तहत की गई थी. उस समय इसका मुख्य काम नकली मुद्रा (काउंटरफिट) पर रोक लगाना था.

1901 में विलियम मैककिनले की हत्या के बाद पहली बार इस एजेंसी को राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई. आज के समय में यह एजेंसी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों की सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक अपराधों की जांच भी करती है और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के तहत काम करती है.

FBI और CIA से कैसे अलग है यह एजेंसी?

एफबीआई और सीआईए जहां खुफिया जानकारी और जांच पर ज्यादा ध्यान देती हैं, वहीं सीक्रेट सर्विस का मुख्य फोकस VIP सुरक्षा और वित्तीय अपराधों की जांच है.

हाल ही की घटना में भी एफबीआई की टीम ने संदिग्ध को हिरासत में लेने और जांच में सहयोग किया.

भारत की SPG और NSG से कितना अलग?

भारत में प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के पास होता है. SPG बेहद हाई-लेवल ट्रेनिंग से लैस होती है और हर कार्यक्रम से पहले लोकेशन को पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है.

इसके अलावा नेशनल सिक्योरिटी गार्ड जैसी एजेंसियां आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन और विशेष परिस्थितियों में तैनात की जाती हैं.

SPG की सुरक्षा कई लेयर में होती है, जिसमें अर्धसैनिक बल और स्थानीय पुलिस भी शामिल रहती है. वहीं सीक्रेट सर्विस भी बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था अपनाती है, लेकिन उसकी भूमिका में आर्थिक अपराधों की जांच भी शामिल रहती है, जो इसे भारतीय एजेंसियों से अलग बनाती है.

पूर्व राष्ट्रपतियों को भी मिलती है सुरक्षा

1958 के एक कानून के तहत अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपतियों, उनकी पत्नी और 15 साल तक के बच्चों को भी सीक्रेट सर्विस सुरक्षा प्रदान करती है. हालांकि, कुछ शर्तों के साथ यह सुरक्षा समय के साथ सीमित हो जाती है.

हर दिन होती है ऐसी स्थितियों की तैयारी

सीक्रेट सर्विस एजेंट्स को हर तरह की आपात स्थिति से निपटने की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. वे लगातार अभ्यास करते हैं ताकि किसी भी खतरे के समय बिना देरी के कार्रवाई कर सकें.

हालिया घटना के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध हमलावर सुरक्षा घेरे के इतना करीब कैसे पहुंचा और उसका मकसद क्या था. यह जांच आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.

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