Haryana News: हरियाणा में अब गुटखा, पान मसाला और सुगंधित तंबाकू जैसे उत्पादों की बिक्री, भंडारण और वितरण पूरी तरह से प्रतिबंधित हो गई है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह बड़ा कदम उठाया है. खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा.
किसने जारी किया आदेश?
यह आदेश हरियाणा के खाद्य सुरक्षा आयुक्त मनोज कुमार द्वारा जारी किया गया है. उन्होंने कहा कि इन तंबाकू उत्पादों से जुड़ा स्वास्थ्य खतरा बेहद गंभीर है, इसलिए इस पर प्रतिबंध जरूरी हो गया था. खासकर राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में इनका अत्यधिक उपयोग सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया था.
क्या-क्या हुआ है बैन?
इस आदेश के तहत अब गुटखा, पान मसाला और फ्लेवर्ड/सुगंधित तंबाकू के निर्माण, बिक्री, स्टोरेज और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. आदेश का उल्लंघन करना अब कानूनी अपराध होगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
स्वास्थ्य को कैसे होता है नुकसान?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन उत्पादों का सेवन करने से कई प्रकार की बीमारियों का खतरा होता है, जैसे मुंह का कैंसर, सांस से जुड़ी बीमारियां, हृदय रोग होने का खतरा होता है. इसके अलावा, इन उत्पादों में मौजूद रसायन जैसे भारी धातुएं, प्रतिबंधित योजक, सिल्वर लीफ और एंटी-केकिंग एजेंट शरीर पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव डाल सकते हैं, जो भविष्य की पीढ़ियों को भी प्रभावित कर सकते हैं.
नूंह ज़िला बना सबसे बड़ी चिंता
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के नूंह जिले में इन प्रतिबंधित उत्पादों की सबसे अधिक खपत देखी गई है. यही वजह है कि वहां इसे रोकने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सभी संबंधित अधिकारियों पुलिस अधीक्षक, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सीएमओ और जनसंपर्क अधिकारी को सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
जागरूकता अभियान भी चलेगा
सरकार केवल रोक लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती. जल्द ही राज्यव्यापी जागरूकता अभियान भी शुरू किया जाएगा, जिसमें जनता को इन उत्पादों के स्वास्थ्य जोखिम और कानूनी परिणामों के बारे में जानकारी दी जाएगी. यह अभियान स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में भी चलाया जाएगा.
कानून के तहत कार्रवाई संभव
यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30 के तहत लगाया गया है, जो राज्य के खाद्य आयुक्त को हानिकारक खाद्य उत्पादों पर रोक लगाने का अधिकार देता है. इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंध का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.
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