जमीन से पैसा निकाल-निकालकर लड़ाकों को सैलरी दे रहा हमास! जंग से पहले कर डाला था ऐसा काम

जा में इस वक्त हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. इजराइल की कड़ी घेराबंदी, हमास के शीर्ष कमांडरों की मौत और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच एक सवाल लगातार चर्चाओं में है कि आखिर जब चारों तरफ से रास्ते बंद हैं, तो हमास अपने लड़ाकों और सिविल कर्मचारियों को हर महीने सैलरी कैसे दे रहा है?

Hamas buried 61 billion rupees at ground giving salary from tier to fighters report reveals
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गाजा में इस वक्त हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. इजराइल की कड़ी घेराबंदी, हमास के शीर्ष कमांडरों की मौत और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच एक सवाल लगातार चर्चाओं में है कि आखिर जब चारों तरफ से रास्ते बंद हैं, तो हमास अपने लड़ाकों और सिविल कर्मचारियों को हर महीने सैलरी कैसे दे रहा है? जवाब है. ज़मीन के नीचे छुपा एक गोपनीय खजाना.

बीबीसी अरबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमास ने गाजा पर इजराइल के हमलों से पहले ही एक रणनीति बना ली थी. याह्या सिनवार के नेतृत्व में संगठन ने लगभग 700 मिलियन डॉलर (करीब 61 अरब रुपये) को अलग-अलग जगहों पर ज़मीन में छुपा दिया था. ये रकम नकद में थी और इसे छोटे बंकरों, गड्ढों और सीक्रेट ठिकानों में छिपाकर रखा गया था. यही कैश अब गाजा में संगठन के बचे-खुचे ढांचे को चलाने के काम आ रहा है.

सैलरी स्ट्रैटजी: बिना बैंक, बिना ट्रांसफर

गाजा में बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह से चरमराया हुआ है. अंतरराष्ट्रीय सीमा बंद है और इजराइल ने फंड ट्रांसफर पर पूरी तरह रोक लगा रखी है. ऐसे में हमास एक बेहद साधारण लेकिन असरदार तरीका अपना रहा है, नकद भुगतान. हमास के अधिकारी हर महीने गुपचुप तरीके से लड़ाकों और सिविल सेवकों को कैश में सैलरी दे रहे हैं. यह रकम सीधे उनके हाथों में दी जा रही है ताकि परिवारों की जरूरतें पूरी हो सकें.

कितने लोगों को मिल रही है सैलरी

गाजा में हमास से जुड़े करीब 30,000 सिविल कर्मचारी हैं. इनमें अस्पताल, शिक्षा, धार्मिक केंद्रों और सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं. इसके अलावा हमास के पास करीब 10,000 लड़ाके भी हैं, जिन्हें हर महीने कम से कम 30,000 रुपये की नकद सैलरी दी जाती है. यह राशि ज़रूरी राशन, दवा और परिवार की जरूरतों के लिए दी जाती है.

इजराइली निगरानी के बावजूद कैसे संभव हुआ ये सब?

इजराइल ने गाजा में राहत सामग्री की आवाजाही पर भी नजर बना रखी है. सीमाओं पर सैनिक तैनात हैं और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है. ऐसे में हमास की नकद रणनीति काफी हद तक लो-टेक लेकिन हाई-इफेक्टिव साबित हो रही है. क्योंकि यह ट्रांजैक्शन डिजिटल नहीं है, कोई बैंकिंग ट्रैकिंग नहीं होती और कैश के बंडलों को छिपाकर भी ले जाया जा सकता है.

हमास की उलटी गिनती शुरू?

हालांकि हमास की ये कैश नीति अभी तक कुछ हद तक कारगर रही है, लेकिन इसकी मियाद अब सीमित लग रही है. इजराइल ने याह्या सिनवार, इस्माइल हानिये और मोहम्मद सिनवार जैसे कई शीर्ष नेताओं को या तो मार गिराया है या गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है. संगठन के पास अब कोई स्पष्ट चेहरा नहीं बचा है, जो नेतृत्व कर सके. राजनीतिक मोर्चे पर भी हमास का समर्थन लगातार घटता जा रहा है. तुर्की जैसे पुराने सहयोगी अब खुलकर समर्थन नहीं दे रहे. कई देश फिलिस्तीन को मान्यता तो देना चाहते हैं, लेकिन हमास को हटाने की शर्त पर.

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