साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए सरकार ला रही नए नियम, लॉन्च होगा MNV प्लेटफॉर्म, जानें क्या बदलेगा

देश में डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों में भी तेज़ी से इज़ाफा हुआ है. बैंकिंग से लेकर ई-कॉमर्स तक, हर क्षेत्र में फ्रॉड के मामलों ने लोगों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए अब केंद्र सरकार साइबर सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है.

govt finalizes new rules to curb cyber fraud plans to launch mobile number validation platform
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देश में डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों में भी तेज़ी से इज़ाफा हुआ है. बैंकिंग से लेकर ई-कॉमर्स तक, हर क्षेत्र में फ्रॉड के मामलों ने लोगों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए अब केंद्र सरकार साइबर सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेक इंडस्ट्री के लिए नए साइबर सिक्योरिटी नियम तैयार कर लिए हैं, जो जल्द ही लागू किए जाएंगे. ये नियम जियो, एयरटेल, बीएसएनएल सहित सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों पर लागू होंगे.

अब हर नंबर की होगी असली पहचान

सरकार की नई योजना के तहत एक मोबाइल नंबर वैलिडेशन (MNV) प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा. यह प्लेटफॉर्म इस बात की पुष्टि करेगा कि किसी टेलीकॉम कंपनी के पास मौजूद ग्राहक की KYC जानकारी उसी व्यक्ति से मेल खाती है जो उस मोबाइल नंबर का उपयोग कर रहा है. सरल शब्दों में कहें तो अब यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी नंबर से कोई और धोखाधड़ी न कर सके. यह प्लेटफॉर्म आने वाले कुछ महीनों में लॉन्च किया जा सकता है.

बैंकों और वित्तीय संस्थानों को मिलेगा बड़ा फायदा

MNV प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा फायदा बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों को होगा. अभी तक ऐसा कोई सिस्टम नहीं था जिससे यह वेरिफाई किया जा सके कि किसी खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर असल में उसी व्यक्ति के नाम है या नहीं. अब जब यह प्लेटफॉर्म शुरू होगा, तो बैंक, बीमा कंपनियाँ और फिनटेक संस्थाएँ ग्राहक का मोबाइल नंबर वेरिफाई करके साइबर फ्रॉड के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकेंगी. इससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है.

यूज़र प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

हालाँकि, हर नया नियम अपने साथ नई चुनौतियाँ भी लाता है. विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई है कि नॉन-टेलीकॉम कंपनियों को इन नियमों के दायरे में लाना यूज़र की प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नए नियमों के तहत टेलीकॉम विभाग के अधीन आने वाली संस्थाओं को बैंकों और अन्य वित्तीय कंपनियों के साथ जोड़ा जाएगा. लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि DoT के अधिकार केवल लाइसेंस प्राप्त टेलीकॉम कंपनियों तक सीमित हैं. ऐसे में गैर-टेलीकॉम संस्थानों को इन नियमों के तहत लाने से डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं.

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