Budget 2026: बुलेट ट्रेन की रफ्तार से दौड़ेगी इकोनॉमी! दुनिया के 165 देशों की जीडीपी से ज्यादा भारत का बजट

Budget 2026: भारत अब सिर्फ उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि वह वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक शक्ति का खुलकर प्रदर्शन कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी झलक देश के ताज़ा सालाना बजट में देखने को मिलती है.

Bigger Than 165 Countries India Annual Budget 2026 Shakes the Global Economy
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Budget 2026: भारत अब सिर्फ उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि वह वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक शक्ति का खुलकर प्रदर्शन कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी झलक देश के ताज़ा सालाना बजट में देखने को मिलती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया 53.5 लाख करोड़ रुपये का बजट न सिर्फ अब तक का सबसे बड़ा भारतीय बजट है, बल्कि यह दुनिया के सैकड़ों देशों की कुल जीडीपी से भी ज्यादा है. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारत किस तेजी से आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

रिकॉर्ड तोड़ सालाना बजट और उसका मतलब

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए घोषित 53.5 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 583.5 अरब डॉलर का बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है. यह पहला मौका है जब देश का सालाना बजट 50 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है. महज कुछ साल पहले तक यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि भारत इतने बड़े स्तर पर सरकारी खर्च की योजना बना पाएगा. यह बजट न केवल सरकारी योजनाओं के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि देश की बढ़ती आय और मजबूत आर्थिक आधार को भी उजागर करता है.

बीते वर्षों में बजट का सफर

अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो बजट में लगातार तेज़ बढ़ोतरी साफ दिखाई देती है. वित्त वर्ष 2025 में बजट 48.21 लाख करोड़ रुपये का था, जबकि उससे पहले 2023 में यह करीब 45 लाख करोड़ रुपये रहा. 2022 में यह आंकड़ा 39.45 लाख करोड़ रुपये तक सीमित था. इन आंकड़ों से यह साफ है कि हर साल सरकार का खर्च बढ़ा है और इसके पीछे बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और आर्थिक विकास पर बढ़ता फोकस रहा है.

मोदी सरकार के कार्यकाल में तीन गुना विस्तार

मोदी सरकार के कार्यकाल का यह 13वां पूर्ण बजट है और इस दौरान बजट व्यय में लगभग तीन गुना की बढ़ोतरी देखने को मिली है. साल 2014 में जब पहली बार पूर्ण बजट पेश किया गया था, तब कुल बजट आकार 17.95 लाख करोड़ रुपये था. अब वही आंकड़ा 53.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह करीब 200 फीसदी की वृद्धि है, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है.

खर्च, आय और घाटे से जुड़े अहम संकेत

इस बजट में सरकार की आय और खर्च दोनों के अनुमान मजबूत दिखाई देते हैं. नॉन-डेट रिसिप्ट्स और कुल खर्च क्रमशः 36.5 लाख करोड़ रुपये और 53.5 लाख करोड़ रुपये अनुमानित हैं. केंद्र की नेट टैक्स रिसिप्ट्स 28.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो टैक्स कलेक्शन में बढ़ती मजबूती को दिखाता है. वहीं वित्तीय अनुशासन की बात करें तो वित्त वर्ष 2026-27 में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.3 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले अनुमान से भी बेहतर है.

कर्ज और अर्थव्यवस्था का संतुलन

सरकार ने इस बजट में कर्ज प्रबंधन पर भी संतुलित रुख दिखाया है. डेट-टू-जीडीपी रेश्यो को धीरे-धीरे कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं. वित्त वर्ष 2026-27 में यह अनुपात 55.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि इससे पहले यह 56.1 फीसदी था. इसका मतलब है कि बढ़ते खर्च के बावजूद सरकार कर्ज के बोझ को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है.

दुनिया के 165 देशों से बड़ा भारतीय बजट

इस बजट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसका आकार दुनिया के करीब 165 देशों की कुल जीडीपी से भी ज्यादा है. वैश्विक स्तर पर देखें तो दुनिया की 27वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सिंगापुर की जीडीपी लगभग 574 अरब डॉलर है, जो भारत के सालाना बजट से कम है. इसी तरह 28वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यूएई की जीडीपी भी करीब 569 अरब डॉलर है. यह तुलना साफ तौर पर बताती है कि भारत का सरकारी खर्च कई देशों की पूरी अर्थव्यवस्था से बड़ा हो चुका है.

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