Budget 2026: भारत अब केवल दुनिया की “फार्मेसी” कहलाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह रिसर्च, इनोवेशन और एडवांस्ड दवा विकास का वैश्विक केंद्र बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए ताज़ा बजट में हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल सेक्टर को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, वे इसी सोच को मजबूती देती हैं. 1000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स के विशाल नेटवर्क की घोषणा भारत के बायोफार्मास्युटिकल भविष्य को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है.
देशभर में फैलेगा रिसर्च का आधार
अब तक भारत में क्लिनिकल ट्रायल का दायरा कुछ चुनिंदा बड़े शहरों तक ही सीमित रहा है. मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहर इस गतिविधि के मुख्य केंद्र रहे हैं. नई योजना का मकसद इस असंतुलन को खत्म करना है. सरकार चाहती है कि रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों तक पहुंचे, जिससे न सिर्फ ट्रायल की गति तेज हो बल्कि छोटे शहर और उभरते मेडिकल हब भी वैश्विक रिसर्च का हिस्सा बन सकें.
बायोफार्मा शक्ति मिशन से मिलेगा नया बल
इस बड़े बदलाव की नींव बायोफार्मा शक्ति मिशन के जरिए रखी जा रही है. अगले पांच वर्षों में इस मिशन के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के क्षेत्र में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना है. खास तौर पर कैंसर, ऑटोइम्यून और अन्य पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए अत्याधुनिक दवाओं के विकास पर फोकस किया जाएगा. सरकार रिसर्च से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और मैन्युफैक्चरिंग तक एक ऐसा एकीकृत इकोसिस्टम बनाना चाहती है, जिसमें रेगुलेशन भी पारदर्शी और सहायक हो.
क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क से बदलेगी तस्वीर
बायोफार्मा शक्ति मिशन के तहत 1000 से ज्यादा मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का निर्माण सबसे अहम घोषणाओं में से एक है. यह नेटवर्क केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यों और विभिन्न क्षेत्रों में भी इसका विस्तार किया जाएगा. इससे दवाओं और वैक्सीन के विकास की रफ्तार बढ़ेगी, क्लिनिकल ट्रायल की लागत घटेगी और भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए एक आकर्षक ट्रायल डेस्टिनेशन बन सकेगा.
फार्मास्युटिकल शिक्षा और रिसर्च को नई दिशा
बजट में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया है. सरकार तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च की स्थापना करेगी और मौजूदा संस्थानों को भी अपग्रेड किया जाएगा. इसका उद्देश्य कुशल वैज्ञानिकों, रिसर्चर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की एक मजबूत फौज तैयार करना है, जो भारत के बायोफार्मा सेक्टर को लंबी अवधि में मजबूती दे सके.
हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल टूरिज्म का विस्तार
रिसर्च और दवा विकास के साथ-साथ बजट में हेल्थकेयर डिलीवरी और वैश्विक पहुंच को भी खास अहमियत दी गई है. सरकार राज्यों के साथ मिलकर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर पांच रीजनल मेडिकल सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है. इसके अलावा भारत की किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली हेल्थकेयर सेवाओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ‘हील इन इंडिया’ पहल शुरू की गई है, जिसका मकसद देश को एक प्रमुख मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है.
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