Budget 2026: AI की एंट्री से सर्विस सेक्टर को लगेंगे पंख, सरकार बनाएगी नया पैनल, जानिए क्या है प्लान

Union Budget 2026: भारत की अर्थव्यवस्था अब उस मोड़ पर खड़ी है, जहां टेक्नोलॉजी सिर्फ सहायक नहीं बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा कारक बन चुकी है.

Union Budget 2026 for Artificial Intelligence sector govt will form a new panel
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Union Budget 2026: भारत की अर्थव्यवस्था अब उस मोड़ पर खड़ी है, जहां टेक्नोलॉजी सिर्फ सहायक नहीं बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा कारक बन चुकी है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 के जरिए साफ संकेत दिया है कि सरकार बदलती डिजिटल दुनिया को समझते हुए नीतियां गढ़ना चाहती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों का सर्विस सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन करने के लिए एक नए पैनल के गठन की घोषणा इसी सोच का हिस्सा है.

AI और सर्विस सेक्टर के रिश्ते की होगी गहन समीक्षा

वित्त मंत्री ने बताया कि AI, ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स आने वाले वर्षों में सर्विस सेक्टर की संरचना को पूरी तरह बदल सकते हैं. ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि इन बदलावों को समय रहते समझा जाए. प्रस्तावित पैनल का काम यह देखना होगा कि AI से कहां अवसर बन रहे हैं और किन क्षेत्रों में चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, ताकि सरकार पहले से ही नीतिगत तैयारी कर सके.

शिक्षा से रोजगार तक मजबूत होगी कड़ी

बजट भाषण में युवाओं की भूमिका को केंद्र में रखते हुए सरकार ने ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइजेज’ नाम की एक हाई-पावर स्टैंडिंग कमेटी बनाने का ऐलान किया. यह कमेटी शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को पाटने पर काम करेगी. सरकार का मानना है कि सर्विस सेक्टर देश के आर्थिक विकास का इंजन है और युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना इसी सेक्टर की मजबूती से जुड़ा हुआ है.

भाषण नहीं, सुधारों पर फोकस

निर्मला सीतारमण ने यह भी साफ किया कि यूनियन बजट 2026 का फोकस बड़े-बड़े वादों की जगह ठोस सुधारों पर है. उन्होंने कहा कि भारत ‘विकसित भारत’ की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और यह बजट उसी यात्रा का अगला कदम है. प्रस्तावित कमेटी सर्विस सेक्टर में ग्रोथ की संभावनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करेगी और सरकार को व्यावहारिक सुझाव देगी.

AI को लेकर सरकार और इंडस्ट्री की साझा सोच

बजट से पहले टेक इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि सरकार AI इकोसिस्टम, इनोवेशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर स्पष्ट रोडमैप पेश करेगी. इससे पहले संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में भी AI को किसी प्रतिस्पर्धा की दौड़ के बजाय एक दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति के रूप में देखा गया. इसमें ओपन और इंटरऑपरेबल सिस्टम पर आधारित, सेक्टर-स्पेसिफिक और नीचे से ऊपर की ओर बढ़ने वाले मॉडल पर जोर दिया गया था.

डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत

बजट 2026 में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़े टैक्स सुधारों की घोषणा की गई है. वित्त मंत्री ने बताया कि भारतीय यूजर्स को भारतीय रिसेलर्स के जरिए क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को वर्ष 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव है. इससे देश में डेटा सेंटर्स में निवेश बढ़ेगा और भारत ग्लोबल क्लाउड हब बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

ग्लोबल क्लाउड कंपनियों के लिए आसान रास्ता

सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स से जुड़ी जटिलताओं को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इससे भारत में लोकल डिस्ट्रीब्यूशन, अनुपालन और बिजनेस स्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल सेवाएं घरेलू जरूरतों के अनुसार ढल सकेंगी.

डेटा सेंटर सेवाओं के लिए सेफ हार्बर नियम

वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि भारत से डेटा सेंटर सेवाएं देने वाली कंपनियों पर लागत का 15 फीसदी सेफ हार्बर लागू होगा. इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल लॉजिस्टिक्स में जस्ट-इन-टाइम मॉडल की दक्षता का बेहतर इस्तेमाल करना है, जिससे ऑपरेशनल अनिश्चितता कम हो सके.

मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग को मिलेगा सहारा

डिजिटल और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को जोड़ने के लिए सरकार ने बॉन्डेड वेयरहाउस में कंपोनेंट स्टोरेज करने वाले नॉन-रेजिडेंट्स को इनवॉइस वैल्यू के 2 फीसदी मुनाफे पर सेफ हार्बर देने का प्रस्ताव रखा है. इससे प्रभावी टैक्स बोझ करीब 0.7 फीसदी रहेगा, जो कई प्रतिस्पर्धी देशों से कम है. इसके अलावा बॉन्डेड जोन में टोल मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करने वाले विदेशी सप्लायर्स को पांच साल की इनकम टैक्स छूट देने की घोषणा भी की गई है.

ग्लोबल टैलेंट को भारत की ओर आकर्षित करने की योजना

भारत को नॉलेज और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को भी राहत दी है. अधिसूचित योजनाओं के तहत भारत आने वाले नॉन-रेजिडेंट एक्सपर्ट्स की विदेश से अर्जित आय को पांच साल तक टैक्स फ्री रखने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही अनुमानित कर प्रणाली के तहत टैक्स देने वाले नॉन-रेजिडेंट्स को न्यूनतम वैकल्पिक कर से छूट देने की बात भी कही गई है. 

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