Budget 2026: भारत ने सच्चे दोस्तों को लेकर किया ऐसा ऐलान, जिससे पाकिस्तान-बाांग्लादेश की हो जाएगी हालत खराब!

Foreign Ministry Budget: केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के बजट में करीब 1,600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल आवंटन 22,119 करोड़ रुपये तय किया है.

Budget 2026 India made such an announcement regarding true friends worsen the condition Pakistan
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Foreign Ministry Budget: केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के बजट में करीब 1,600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल आवंटन 22,119 करोड़ रुपये तय किया है. यह बढ़ोतरी सिर्फ एक वित्तीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं का संकेत भी देती है. बजट दस्तावेजों से साफ झलकता है कि सरकार ने ‘नेबर फर्स्ट’ नीति को ध्यान में रखते हुए पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नए सिरे से संतुलित करने की रणनीति अपनाई है.

इस नए आवंटन में जहां कुछ देशों के लिए सहायता और सहयोग बढ़ाया गया है, वहीं कुछ मामलों में कटौती कर स्पष्ट संदेश दिया गया है कि संसाधनों का इस्तेमाल प्रदर्शन और सहयोग की वास्तविक स्थिति के आधार पर होगा.

अफगानिस्तान के लिए बढ़ी मदद

अफगानिस्तान के लिए आवंटन में 50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल राशि 150 करोड़ रुपये कर दी गई है. यह फैसला मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं के लिहाज से अहम माना जा रहा है. रणनीतिक जानकारों के मुताबिक, काबुल के लिए भारत की बढ़ी हुई सहायता सिर्फ मानवीय समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में भारत की भागीदारी बढ़ने से पाकिस्तान की पारंपरिक रणनीति को चुनौती मिल सकती है. भारत की मानवीय और विकास से जुड़ी पहल से वहां उसकी पकड़ मजबूत होने की संभावना है, जो क्षेत्रीय राजनीति में नई समीकरण पैदा कर सकती है.

बांग्लादेश और मालदीव को लेकर सख्त रुख

बजट में बांग्लादेश से जुड़े मामलों के लिए आवंटन घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है. पिछले वर्ष के आवंटन का पूरा उपयोग न हो पाने के कारण यह कटौती की गई है. इससे संकेत मिलता है कि ढाका के साथ सहयोग अब ज्यादा व्यावहारिक और परिणाम आधारित दृष्टिकोण से किया जाएगा.

मालदीव के लिए भी आवंटन में 50 करोड़ रुपये की कमी करते हुए कुल राशि 550 करोड़ रुपये तय की गई है. इन कटौतियों को क्षेत्रीय कूटनीति में एक संतुलित संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहां सहयोग तो जारी रहेगा, लेकिन संसाधनों का आवंटन प्रदर्शन और प्राथमिकताओं के आधार पर होगा.

नेपाल और भूटान को मिला बड़ा समर्थन, चीन की सक्रियता पर नजर

सबसे अहम संकेत नेपाल और भूटान को लेकर सामने आए हैं. नेपाल के लिए बजट बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 100 करोड़ रुपये ज्यादा है. यह बढ़ोतरी विकास परियोजनाओं और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती देने के उद्देश्य से की गई है.

भूटान के लिए 2,288 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन किया गया है, जिससे भारत-भूटान विकास साझेदारी और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल और भूटान में भारत की वित्तीय मदद में यह इजाफा ऐसे समय हुआ है जब चीन इन देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में भारत का यह कदम क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

श्रीलंका को राहत, आर्थिक संकट से उबरने में मदद

श्रीलंका के लिए भी भारत ने बजट में 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है, जिससे कुल आवंटन 400 करोड़ रुपये हो गया है. आर्थिक संकट से जूझ रहे कोलंबो के लिए यह सहायता महत्वपूर्ण मानी जा रही है. भारत की ओर से दी जा रही वित्तीय मदद और विकास सहयोग से श्रीलंका को स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ने में सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

पड़ोस में संतुलन, मानवीय सहयोग और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय के बजट का यह नया स्वरूप भारत की पड़ोसी देशों के प्रति बहुआयामी रणनीति को दर्शाता है. एक तरफ जहां मानवीय सहायता और विकास सहयोग को बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी ओर संसाधनों के आवंटन के जरिए रणनीतिक संदेश भी दिया गया है.

इस बजट ढांचे से यह साफ होता है कि भारत अपने पड़ोस में प्रभावी संतुलन बनाए रखने, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी भूमिका को सशक्त करने की दिशा में एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है.

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