मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और मार्क जुकरबर्ग की फेसबुक (मेटा प्लेटफॉर्म्स) ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक नई बड़ी साझेदारी की है. दोनों कंपनियों ने ‘रिलायंस एंटरप्राइज इंटेलिजेंस लिमिटेड (REIL)’ नाम की संयुक्त कंपनी (जॉइंट वेंचर) की स्थापना की है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में इस नई कंपनी के गठन की आधिकारिक घोषणा की. इसमें बताया गया कि दोनों कंपनियों ने मिलकर ₹855 करोड़ रुपए का शुरुआती निवेश किया है. इस निवेश का उद्देश्य भारत और वैश्विक बाजारों के लिए अत्याधुनिक AI सर्विसेज और समाधान (solutions) तैयार करना है.
कौन-कितनी हिस्सेदारी रखेगा?
रिलायंस ने शुरुआती निवेश के रूप में 2 करोड़ रुपए लगाए हैं. कंपनी ने 20 मिलियन इक्विटी शेयर खरीदे हैं, जिनकी कीमत ₹10 प्रति शेयर रखी गई है.
कंपनी का उद्देश्य और कामकाज
रिलायंस की AGM (वार्षिक आम बैठक) में अगस्त 2025 में इस साझेदारी की झलक दिखाई गई थी. अब औपचारिक रूप से इस जॉइंट वेंचर को शुरू किया गया है.
REIL का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भारत के व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से अपनाने में मदद करना होगा. कंपनी मेटा के ओपन-सोर्स LLaMA मॉडल्स और रिलायंस की व्यापक बिजनेस पहुंच को मिलाकर AI आधारित समाधान तैयार करेगी.
REIL किन प्रोडक्ट्स पर काम करेगी?
कंपनी दो प्रमुख क्षेत्रों में काम करेगी —
एंटरप्राइज AI प्लेटफॉर्म-एज़-ए-सर्विस (PaaS):
इस प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियां अपने हिसाब से जेनरेटिव AI मॉडल्स तैयार कर सकेंगी और उन्हें अपने काम में इस्तेमाल कर पाएंगी.
प्री-कॉन्फिगर्ड AI सॉल्यूशंस:
ये समाधान सेल्स, मार्केटिंग, IT ऑपरेशंस, कस्टमर सर्विस और फाइनेंस जैसे सेक्टर्स के लिए होंगे. इनसे कारोबारियों को समय, श्रम और लागत, तीनों की बचत होगी.
मेटा की टेक्नोलॉजी रिलायंस का नेटवर्क
इस पार्टनरशिप में मेटा (फेसबुक) अपनी उन्नत AI क्षमताएं और LLaMA मॉडल्स से जुड़ी तकनीकी विशेषज्ञता देगी. वहीं, रिलायंस अपने विशाल डिजिटल इकोसिस्टम, जियो प्लेटफॉर्म्स, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और लाखों छोटे-बड़े भारतीय व्यवसायों तक पहुंच का फायदा उठाएगी.
REIL द्वारा तैयार किए जा रहे AI टूल्स और सर्विसेज को
तीनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा.
इनका लक्ष्य कंपनियों की लागत घटाना और प्रोडक्टिविटी बढ़ाना है.
सरकार या नियामक से कोई आपत्ति नहीं
रिलायंस की फाइलिंग के मुताबिक, REIL का गठन रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के दायरे में नहीं आता है और इसमें रिलायंस के प्रमोटर्स या समूह कंपनियों का कोई निजी हित नहीं है. साथ ही, इस जॉइंट वेंचर को बनाने के लिए किसी सरकारी या रेगुलेटरी अनुमति की आवश्यकता नहीं पड़ी.
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