F-22 और F-35 का भी बाप है ये फाइटर जेट, अमेरिका के खिलाफ युद्ध में उतारेगा चीन? भारत-पाक जंग में भी पड़ेगा भारी

एशिया की सैन्य दौड़ में एक नई हलचल मचाते हुए चीन ने 20 मई को अपने नवीनतम और सबसे एडवांस मिलिट्री रडार सिस्टम JY-27V का अनावरण कर दिया है.

F22 F35 fighter jet China America Indo-Pak war
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

नई दिल्लीः एशिया की सैन्य दौड़ में एक नई हलचल मचाते हुए चीन ने 20 मई को अपने नवीनतम और सबसे एडवांस मिलिट्री रडार सिस्टम JY-27V का अनावरण कर दिया है. यह नया रडार सिस्टम न केवल तकनीकी रूप से उन्नत बताया जा रहा है, बल्कि चीन का दावा है कि यह अब स्टील्थ तकनीक वाले फाइटर जेट्स को भी ट्रैक कर सकता है—जिन्हें अब तक 'अदृश्य' माना जाता रहा है.

यह ट्रक-माउंटेड रडार सिस्टम चीन की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी CETC (चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉरपोरेशन) द्वारा विकसित किया गया है. हेफेई, अनहुई प्रांत में आयोजित वर्ल्ड रेडियो डिटेक्शन एंड रेंजिंग एक्सपो में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया.

स्टील्थ टेक्नोलॉजी को चुनौती देने वाला कदम

JY-27V दरअसल चीन के पुराने JY-27A रडार का उन्नत संस्करण है, जिसे खासतौर पर अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट्स जैसे F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग से मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. चीन ने दावा किया है कि यह रडार हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो वेव्स का उपयोग कर ऐसे विमानों की मौजूदगी का पता लगाने में सक्षम है, जिन्हें पारंपरिक रडार सिस्टम पकड़ने में विफल रहते हैं.

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने जानकारी दी है कि इस रडार का AESA (Active Electronically Scanned Array) एंटीना कुछ ही मिनटों में खुलकर एक्टिव हो सकता है, जिससे इसे तेजी से किसी भी युद्ध क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है. इसका विशाल एंटीना सिस्टम इसकी विशिष्ट पहचान है, जिसे स्टील्थ विमानों की पहचान करने में अहम बताया जा रहा है.

क्या युद्ध के समीकरण बदलेंगे?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन इस एडवांस रडार सिस्टम को दक्षिण चीन सागर और ताइवान स्ट्रेट जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात करने की योजना बना रहा है. यह क्षेत्र पहले से ही चीन और अमेरिका के बीच सैन्य तनातनी का केंद्र रहे हैं. विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्टील्थ विमानों की पहचान अब संभव हो गई है, तो इससे आधुनिक युद्ध रणनीतियों में बड़ा बदलाव आ सकता है.

सिर्फ पहचान काफी नहीं, सवाल अभी बाकी हैं

हालांकि, बुल्गेरियन मिलिट्री डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टील्थ विमान का पता लगा लेना ही काफी नहीं है. उस पर हमला करना, खासकर तब जब वह तेज गति से उड़ रहा हो और उसका RCS (Radar Cross Section) बहुत कम हो, यह एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम के बीच बेहद सटीक तालमेल की जरूरत होती है. यह सवाल बना हुआ है कि क्या चीन के पास वह लेवल का इंटीग्रेशन और परफॉर्मेंस है जो इसे प्रभावी बनाता है?

पाकिस्तान को रडार सौंपे जाने की अटकलें तेज

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन अपने रणनीतिक सहयोगी पाकिस्तान को भी यह नया रडार सिस्टम दे सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के चाइनीज रडार सिस्टम को बेहद आसानी से निष्क्रिय कर दिया था. इससे पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे.

माना जा रहा है कि चीन अब अपने इस नए रडार सिस्टम को पाकिस्तान को देकर उसकी एयर डिफेंस को मजबूती देने का प्रयास कर सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान, चीन के लिए केवल एक सामरिक साझेदार नहीं, बल्कि हथियारों के परीक्षण की प्रयोगशाला भी बन चुका है.

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