दुश्मनों की हर साजिश होगी नाकाम! 'भार्गवास्त्र' बनेगा ड्रोन का काल, सफल टेस्ट से बढ़ी सेना की ताकत

Bhargavastra Counter Drone System: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. हवाई हमलों और ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए देश में तैयार किया गया 'भार्गवास्त्र' काउंटर-ड्रोन सिस्टम सफलतापूर्वक परीक्षण में खरा उतरा है.

Every enemy plot will be thwarted Bhargavastra to spell doom for drones successful test boosts Army might
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Bhargavastra Counter Drone System: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. हवाई हमलों और ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए देश में तैयार किया गया 'भार्गवास्त्र' काउंटर-ड्रोन सिस्टम सफलतापूर्वक परीक्षण में खरा उतरा है. इसका ट्रायल महाराष्ट्र के नागपुर में भारतीय सेना के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया.

पूरी तरह स्वदेशी है भार्गवास्त्र

'भार्गवास्त्र' को Solar Defence and Aerospace Limited (SDAL) ने विकसित किया है. यह एक वाहन पर लगाया जाने वाला मल्टी-लेयर काउंटर-ड्रोन सिस्टम है. इसे हथियारों से लैस ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और एक साथ हमला करने वाले ड्रोन के झुंड (ड्रोन स्वार्म) को रोकने के लिए बनाया गया है.

माइक्रो-मिसाइल और रॉकेट से करेगा हमला

इस सिस्टम में भारत में विकसित अनगाइडेड रॉकेट और सटीक निशाना लगाने वाली माइक्रो-मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है. यह अलग-अलग स्तर पर दुश्मन के ड्रोन को पहचानकर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है. इसका मकसद कम खर्च में बेहतर सुरक्षा देना है.

सेना के मौजूदा सिस्टम के साथ करेगा काम

भार्गवास्त्र को इस तरह तैयार किया गया है कि इसे भारतीय सशस्त्र बलों के मौजूदा कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस (C4I) सिस्टम के साथ आसानी से जोड़ा जा सके. इससे भविष्य के आधुनिक सैन्य अभियानों में इसका इस्तेमाल आसान होगा.

पहाड़, रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में भी तैनात होगा

यह सिस्टम भारत की अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में काम कर सकता है. इसे रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और समुद्र तल से 5,000 मीटर तक ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में भी तैनात किया जा सकता है. इससे देश की सीमाओं पर हवाई खतरों से बेहतर सुरक्षा मिलेगी.

10 किलोमीटर दूर तक ड्रोन पकड़ने की क्षमता

भार्गवास्त्र के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में एडवांस्ड C4I सिस्टम दिया गया है. इसमें ऐसा रडार लगा है जो 10 किलोमीटर तक ड्रोन का पता लगा सकता है. इसके अलावा EO/IR कैमरे और RF सेंसर भी मौजूद हैं, जो ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और निगरानी करने में मदद करते हैं. इससे ऑपरेटर एक साथ कई ड्रोन पर नजर रख सकते हैं.

पारंपरिक सिस्टम से अलग

जहां कई काउंटर-ड्रोन सिस्टम सिर्फ जैमिंग या स्पूफिंग पर काम करते हैं, वहीं भार्गवास्त्र सीधे ड्रोन को निशाना बनाकर नष्ट करने वाला हार्ड-किल सिस्टम है. इसलिए यह ऐसे ऑटोनॉमस ड्रोन के खिलाफ भी असरदार है, जिन पर इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का असर नहीं होता.

भारतीय सेना ने किया सिस्टम का निरीक्षण

24 जुलाई 2026 को भारतीय सेना की एक टीम ने नागपुर स्थित SDAL प्लांट का दौरा किया. टीम ने भार्गवास्त्र के पूरे सिस्टम का प्रदर्शन देखा, जिसमें कमांड एंड कंट्रोल व्हीकल, रडार, EO/IR सेंसर, RF डिटेक्टर और लॉन्चर वाहन शामिल थे.

डेमो के दौरान कंपनी ने कई ड्रोन उड़ाए, जिन्हें सिस्टम ने सफलतापूर्वक पहचान लिया. इसके बाद C4I सिस्टम ने खतरे की जानकारी दी और लॉन्चर को लक्ष्य सौंपने की पूरी प्रक्रिया भी दिखाई गई. सुरक्षा कारणों से इस प्रदर्शन के दौरान असली रॉकेट फायरिंग नहीं की गई.

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