Meteor Missiles: रक्षा मंत्रालय ने इस वित्तवर्ष 2025-26 में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. दिसंबर 2025 तक मंत्रालय ने कुल 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं. इस पहल का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को आधुनिक हथियारों और तकनीकों से मजबूत करना है.
इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण निर्णय डिफेंस अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लिया, जिसने इंडियन एयर फोर्स (IAF) के लिए 36 अतिरिक्त मेटियोर बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद के लिए औपचारिक मंजूरी दी.
AoN से क्यों होती है खरीद की शुरुआत?
डिफेंस अधिग्रहण परिषद, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं, ने इस सप्ताह राफेल फाइटर जेट्स के लिए मीटियोर मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी. यह कदम ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) के तहत लिया गया. AoN का मतलब है कि मिसाइलों की आवश्यकता औपचारिक तौर पर तय कर दी गई है, जिससे आगे की खरीद प्रक्रिया तेज हो सके.
AoN का महत्व इसलिए है कि इससे फॉलो-ऑन डील के फाइनल क्लोजर से पहले ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इसका फायदा यह होता है कि जब कमर्शियल बातचीत पूरी होती है, तो डिलीवरी की टाइमलाइन कम हो जाती है और मिसाइलों की सप्लाई जल्दी शुरू हो सकती है. इस निर्णय से IAF के राफेल फाइटर जेट्स की एयर डिफेंस क्षमता और अधिक मजबूत होगी.
मीटियोर मिसाइल: आधुनिक हवाई युद्ध का गेम-चेंजर
मीटियोर मिसाइल को यूरोपीय कंसोर्टियम MBDA द्वारा विकसित किया गया है और यह एयर-टू-एयर मिसाइलों में सबसे एडवांस तकनीक के रूप में जानी जाती है. पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में, मीटियोर मिसाइल सॉलिड-फ्यूल वेरिएबल फ्लो डक्टेड रॉकेट (रैमजेट) टेक्नोलॉजी से लैस है. इसका मतलब है कि मिसाइल अपने इंजन की थ्रॉटलिंग कर सकती है और पूरे रास्ते में उच्च ऊर्जा बनाए रखती है.
इस तकनीक के चलते मीटियोर मिसाइल मैक 4 से अधिक की रफ्तार से अपने टारगेट तक पहुंच सकती है. इसकी लंबी दूरी, जो लगभग 200 किलोमीटर तक है, IAF को दुश्मन के डिफेंस रेंज से बाहर रहते हुए एयरस्पेस पर प्रभुत्व बनाए रखने में सक्षम बनाती है. इससे पायलट सुरक्षित रहते हुए दुश्मन के एयरोस्पेस में ऑपरेशन्स कर सकते हैं.
एयर फोर्स की रणनीतिक बढ़त
मीटियोर मिसाइल के आने से इंडियन एयर फोर्स की फ्रंटलाइन राफेल फ्लीट को लंबी दूरी से दुश्मन की हवाई ताकत को नष्ट करने की क्षमता मिलेगी. इस कदम से न सिर्फ भारत का हवाई रक्षा ढांचा मजबूत होगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रभुत्व में भी वृद्धि होगी.
रक्षा मंत्रालय के आधुनिकीकरण और AoN फैसलों से यह संकेत मिलता है कि भारत अपने हवाई बलों को नई तकनीक और आधुनिक हथियारों से लैस करने में तेजी ला रहा है. आने वाले समय में यह कदम भारतीय वायु सेना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत और अधिक सक्षम बनाने में मदद करेगा.
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