सीजफायर बहुत कमजोर स्थिति में... ट्रंप ने ठुकराया ईरान का प्रस्ताव, भीषण हमले की तैयारी कर रहा अमेरिका?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष विराम (सीजफायर) को लेकर चिंता जताई है. ट्रंप ने इसे कमजोर स्थिति में बताते हुए कहा कि यह लगभग लाइफ सपोर्ट पर टिका हुआ है.

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वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष विराम (सीजफायर) को लेकर चिंता जताई है. ट्रंप ने इसे कमजोर स्थिति में बताते हुए कहा कि यह लगभग लाइफ सपोर्ट पर टिका हुआ है. उनका यह बयान उस समय आया जब उनसे ईरान के शांति प्रस्ताव और चल रही वार्ता पर सवाल किया गया.

ईरान का प्रस्ताव ठुकराया

ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए हालिया शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव पढ़ा और वह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका पर किसी तरह का दबाव नहीं है और देश पूरी जीत की ओर बढ़ रहा है.

शांति प्रयासों के बावजूद जारी तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ महीनों से शांति बहाली की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला. फरवरी 28 से शुरू हुए संघर्ष ने कई क्षेत्रों में तनाव बढ़ा दिया. अप्रैल में दोनों पक्षों ने अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई थी, लेकिन स्थिति अभी भी स्थिर नहीं है.

ईरान की शर्तें और शांति प्रस्ताव

ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने युद्ध रोकने की इच्छा जताई है. ईरान चाहता है कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष विराम लागू हो. इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की शर्त भी रखी. अमेरिका का रुख था कि पहले शत्रुता समाप्त हो और फिर संवेदनशील मुद्दों जैसे परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की जाए.

परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर विवाद

अमेरिका लगातार ईरान से अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की मांग कर रहा है. इसके बदले में अमेरिका ने प्रतिबंधों को हटाने और फ्रीज किए गए धन को रिलीज करने का प्रस्ताव रखा है. वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी शामिल है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है.

वैश्विक बाजारों में अस्थिरता की आशंका

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर तेल की आपूर्ति और कीमतों पर सीधे पड़ेगा.

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