US Iran Ceasefire Talk: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्धविराम के लिए एक नई पहल करते हुए पीछे हटते नजर आ रहे हैं. उन्होंने ईरान को एक 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना भेजी है, जिसे पाकिस्तान के माध्यम से ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाया गया. हालांकि, ईरान इस योजना को लेकर किसी भी तरह की बातचीत से इंकार कर रहा है, फिर भी ट्रंप का यह कदम इजरायल के लिए चिंता का विषय बन गया है. इजरायल को डर है कि ट्रंप प्रशासन, ईरान पर लगातार सैन्य दबाव डालने के बजाय, एक अधूरे और 'कच्चे' समझौते पर हस्ताक्षर कर सकता है, जो उसकी सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है.
इजरायल का डर क्या है?
इजरायल के सामने इस समय कई प्रकार की चिंताएँ हैं. सबसे बड़ा डर यह है कि ट्रंप और उनके सहयोगी जल्दबाजी में एक 'फ्रेमवर्क एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. इजरायल का मानना है कि जब तक ईरान इस 15-सूत्रीय योजना को पूरी तरह से लागू नहीं कर देता, तब तक युद्धविराम नहीं होना चाहिए. इसके अलावा, इजरायल सरकार को यह चिंता भी है कि अगर एक महीने का सीजफायर घोषित कर दिया गया और वार्ता लंबी खिंच गई, तो यह समझौता अधूरा रह सकता है, जिससे ईरान को बड़ी रियायतें मिल सकती हैं.
इजरायल के लिए 'अधूरा समझौता' एक बड़ा संकट
चैनल 12 के मुताबिक, इजरायल के नेताओं को यह चिंता सता रही है कि अगर एक महीने के सीजफायर के बाद भी बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तो यह समझौता केवल एक 'अधूरा समाधान' बनकर रह जाएगा. इजरायल को शक है कि ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किए गए समझौते में कोई ठोस शर्तें नहीं हो सकतीं, और इस स्थिति में ईरान को अपनी जीत के रूप में प्रस्तुत कर सकता है. ऐसे में, इजरायल का यह डर भी बढ़ गया है कि एक आधे-अधूरे समझौते से ईरान को सैन्य दबाव से बाहर निकलने का मौका मिल सकता है, जबकि इजरायल को इससे कोई लाभ नहीं होगा.
ईरान का ऊपरी हाथ: एक संभावित खतरा
इजरायल को यह भी डर है कि यदि युद्धविराम बिना किसी स्पष्ट शर्तों के किया जाता है, तो ईरान इसे अपनी जीत के रूप में पेश कर सकता है. इजरायली खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि अभी भी दोनों पक्षों के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है, और ईरान अपनी ओर से उन शर्तों को मानने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होगा, जैसे अमेरिका दावा कर रहा है. इस स्थिति में, अगर कोई समझौता होता भी है, तो वह इजरायल के हित में नहीं होगा और ईरान को न केवल सैन्य दबाव से राहत मिलेगी, बल्कि उसे यह भी दिखाने का मौका मिलेगा कि उसने संघर्ष में जीत हासिल की.
'मैक्स फ्लेक्सिबिलिटी' बनाम 'फिक्स्ड टारगेट'
इजरायल को यह भी चिंता है कि ट्रंप अपनी 'मैक्स फ्लेक्सिबिलिटी' नीति के तहत कभी भी अपनी रणनीति बदल सकते हैं. इसके चलते इजरायल खुद को अकेला महसूस कर सकता है, क्योंकि ट्रंप किसी भी कीमत पर युद्ध समाप्त करने और समझौता करने के लिए तैयार हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में, भले ही ईरान सिर्फ कुछ शर्तों को स्वीकार करे और बाकी को नकार दे, ट्रंप समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं. इससे इजरायल की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि इजरायल चाहता है कि जब तक ईरान सभी शर्तों को पूरी तरह से लागू नहीं करता, तब तक सैन्य दबाव जारी रहना चाहिए.
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