ट्रंप करना चाहते हैं बातचीत, लेकिन किम जोंग उन नहीं उठा रहे फोन, तानाशाह की खामोशी ने बढ़ाया सस्पेंस!

अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्तों में एक बार फिर पुरानी कहानी नए अंदाज में लौटती दिख रही है. कभी एक-दूसरे को तीखी धमकियां देने वाले डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच व्यक्तिगत समीकरणों ने कई बार दुनिया को चौंकाया है.

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अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्तों में एक बार फिर पुरानी कहानी नए अंदाज में लौटती दिख रही है. कभी एक-दूसरे को तीखी धमकियां देने वाले डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच व्यक्तिगत समीकरणों ने कई बार दुनिया को चौंकाया है. अब ट्रंप फिर किम से बातचीत की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बार प्योंगयांग की तरफ से अपेक्षित गर्मजोशी नजर नहीं आ रही. रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप संपर्क करना चाहते हैं, जबकि किम की ओर से उनकी कोशिशों पर चुप्पी बनी हुई है.

बातचीत का रास्ता तलाश रहे ट्रंप

ट्रंप का मानना है कि किम के साथ उनके पुराने रिश्ते दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खोल सकते हैं. अपने पहले कार्यकाल में दोनों नेता तीन बार आमने-सामने मिले थे और उस दौरान परमाणु तनाव कम होने की उम्मीद भी बनी थी, हालांकि कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका. अब ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाली संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज को भी कम करने का फैसला किया है. उनका तर्क है कि ऐसे अभ्यास उत्तर कोरिया को उकसाने वाले संकेत देते हैं और बातचीत की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

क्या किम ने वाकई ट्रंप की कॉल का जवाब नहीं दिया?

ट्रंप ने हाल में संकेत दिया कि किम ने उनकी कोशिश का जवाब दिया है और बातचीत को सकारात्मक बताया. हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि दोनों नेताओं के बीच सीधे फोन पर बातचीत हुई या किसी दूसरे माध्यम से संदेश पहुंचा. दूसरी ओर, किम यो-जोंग ने अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच ऐसी किसी मौजूदा बातचीत की जानकारी से इनकार किया है. ऐसे में यह दावा करना जल्दबाजी होगा कि किम ट्रंप का फोन नहीं उठा रहे हैं. फिलहाल इतना जरूर साफ है कि दोनों पक्षों के बयानों में अंतर बना हुआ है.

किम क्यों बना रहे दूरी?

ट्रंप और किम के रिश्तों में सबसे बड़ा मोड़ 2019 के हनोई शिखर सम्मेलन के बाद आया, जब दोनों देश बिना समझौते के लौटे. इसके बाद भरोसे की खाई और गहरी होती गई. अमेरिकी प्रशासन की सख्त टिप्पणियों और गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसी योजनाओं को लेकर भी प्योंगयांग की नाराजगी बढ़ी है. उत्तर कोरिया अब खुद को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में स्थापित करना चाहता है और अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा. ऐसे माहौल में किम के लिए ट्रंप की बातचीत की पेशकश स्वीकार करना आसान नहीं दिखता.

दोस्ती की पुरानी केमिस्ट्री क्या फिर ला पाएगी बातचीत?

ट्रंप और किम के बीच व्यक्तिगत रिश्ते भले ही कभी कूटनीतिक सफलता की उम्मीद जगाते रहे हों, लेकिन इस बार परिस्थितियां पहले से ज्यादा जटिल हैं. ट्रंप बातचीत का दरवाजा खोलना चाहते हैं, जबकि उत्तर कोरिया अमेरिका को अब भी अपना विरोधी मानता है. यही वजह है कि आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या दोनों नेताओं की पुरानी व्यक्तिगत केमिस्ट्री एक बार फिर राजनीतिक बातचीत में बदल पाएगी या किम इस बार दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझेंगे.

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