US Iran Sanctions: अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए बड़ा आर्थिक अभियान शुरू किया है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम दिया है. इस अभियान के तहत ईरान के आर्थिक नेटवर्क, तेल से होने वाली कमाई और दूसरे देशों के साथ उसके वित्तीय संबंधों को निशाना बनाया जाएगा. बेसेंट के मुताबिक, यह अभियान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर शुरू किया गया है. उन्होंने इसकी तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए डी-डे अभियान से की.
ईरान के खिलाफ अमेरिका का बड़ा प्लान
बेसेंट ने कहा कि अमेरिका अब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा. इसका मकसद ईरानी सरकार और उससे जुड़े संगठनों तक पहुंचने वाले पैसों के रास्ते को रोकना है.
उन्होंने कहा कि इस अभियान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर भी दबाव बनाया जाएगा. अमेरिका चाहता है कि ईरान को आर्थिक मदद और कारोबार के जरिए मिलने वाला सहारा कमजोर हो.
इन 5 क्षेत्रों पर होगा सबसे ज्यादा असर
अमेरिकी अभियान के तहत डिजिटल संपत्ति, तकनीक, सोना, विमानन और समुद्री कारोबार जैसे क्षेत्रों पर खास नजर रखी जाएगी. बेसेंट ने कहा कि दूसरे देशों के लिए भी अब यह तय करने का समय है कि वे अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध रखना चाहते हैं या ईरान के साथ. उन्होंने ईरान के सामने भी दो रास्ते बताए या तो वह दुनिया से और अलग-थलग हो जाए या फिर सामान्य आर्थिक संबंधों की ओर लौटे.
करीब 60 संस्थाओं और जहाजों पर कार्रवाई
बेसेंट के बयान से पहले ही अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान से जुड़े करीब 60 संस्थाओं, लोगों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए थे. इनका संबंध परमाणु, मिसाइल, साइबर और तेल नेटवर्क से बताया गया है.
अमेरिका ने उन कंपनियों और बिचौलियों को भी निशाना बनाया है, जो ईरान के तेल कारोबार और उसके शैडो फ्लीट को मदद पहुंचाने का आरोप झेल रहे हैं. ये नेटवर्क संयुक्त अरब अमीरात, चीन, हांगकांग, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और यूरोप जैसे इलाकों से जुड़े बताए गए हैं.
ईरान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा दबाव
अमेरिका की इस कार्रवाई के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रही है. ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गई है. वहीं युद्ध के बाद खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है.
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का मकसद ईरान की आर्थिक ताकत और उससे जुड़े नेटवर्क को कमजोर करना है. अब देखना होगा कि अमेरिकी दबाव के बीच तेहरान क्या कदम उठाता है.
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