Ajit Doval in China: भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल बीजिंग पहुंच रहे हैं. वह मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में शामिल होंगे. इस बैठक में सबसे ज्यादा जोर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने पर रहेगा.
यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आने की उम्मीद है. ऐसे में डोभाल और वांग यी की बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष LAC पर मौजूदा हालात की पूरी समीक्षा कर सकते हैं. यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर खबरें सामने आई हैं.
क्या होगा बातचीत का एजेंडा?
विशेष प्रतिनिधि वार्ता के तहत अजीत डोभाल और वांग यी 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद को सुलझाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे. हाल की चीनी गतिविधियों को देखते हुए बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने और किसी नए तनाव को रोकने पर खास जोर रहने की उम्मीद है.
दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 में हुए सैनिकों की वापसी के समझौते की भी समीक्षा कर सकते हैं. इसके बाद सीमा पर तनाव कम करने के लिए उठाए गए कदमों पर भी चर्चा होगी.
इसके अलावा सीमा पर पेट्रोलिंग के अधिकार बहाल करने और 2020 के गलवान घाटी विवाद के बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति वापस लाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर बात हो सकती है.
बैठक में सीमा विवाद से जुड़े विशेषज्ञों के एक समूह पर भी चर्चा संभव है. यह समूह WMCC के तहत बनाया गया है और इसका काम सही इलाकों में सीमा तय करने की दिशा में शुरुआती काम करना है.
सीमा प्रबंधन पर भी होगी बात
डोभाल और वांग यी सीमा प्रबंधन से जुड़े मौजूदा इंतजामों को और मजबूत करने पर भी चर्चा कर सकते हैं. इसमें पश्चिमी सेक्टर के मौजूदा तंत्र के साथ पूर्वी और मध्य सेक्टर में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के स्तर पर बातचीत के सिस्टम को मजबूत करना शामिल है.
इसके अलावा दोनों देशों के आपसी रिश्तों और 2005 में हुए ‘राजनीतिक पैरामीटर और मार्गदर्शक सिद्धांतों’ से जुड़े समझौते को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है.
शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले अहम बैठक
इन बातचीत का एक बड़ा मकसद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच सकारात्मक माहौल बनाना भी माना जा रहा है. 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग के भारत आने की उम्मीद है.
हालांकि, भारत और चीन ने अभी तक शी जिनपिंग के दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. दोनों देशों के अधिकारी उनके आने की उम्मीद कर रहे हैं. अगर शी भारत आते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात का रास्ता भी बन सकता है.
मोदी और शी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन के दौरान हुई थी. ऐसे में डोभाल और वांग यी की यह बैठक दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत और सीमा पर तनाव कम करने के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है.