Modi Putin Meetings: भारत और रूस के रिश्तों के बीच आने वाले महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कम से कम तीन अहम मुलाकातें हो सकती हैं. पहली मुलाकात अगले हफ्ते बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान होने की उम्मीद है.
इसके बाद 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दोनों नेता फिर आमने-सामने होंगे. इसके अलावा भारत और रूस के बीच होने वाली सालाना शिखर बैठक को लेकर भी दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को पुतिन से मुलाकात के दौरान इस बारे में जानकारी दी.
मोदी-पुतिन की तीन अहम मुलाकातें
जयशंकर ने पुतिन से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं और उनका निजी संदेश भी दिया. उन्होंने बताया कि मोदी एससीओ सम्मेलन में पुतिन से मिलने के इच्छुक हैं. इसके बाद ब्रिक्स सम्मेलन में भारत में उनका स्वागत किया जाएगा. दोनों देशों की सहमति से सालाना शिखर बैठक भी आयोजित की जाएगी.
इससे पहले जयशंकर और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव की अध्यक्षता में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक हुई. इसमें व्यापार, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग और तकनीक समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
रूस बढ़ाएगा भारत को उर्वरक की सप्लाई
पुतिन ने भारत को उर्वरक की आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि रूस भारतीय किसानों और कृषि की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उर्वरक की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारत में उर्वरक की सप्लाई पर असर पड़ा है. ऐसे में भारत ने रूस से आपूर्ति बढ़ाने का आग्रह किया है. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के साथ बातचीत में भी यह मुद्दा उठाया था.
परमाणु ऊर्जा और तकनीक पर भी बढ़ेगा सहयोग
पुतिन ने भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और दूसरे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर संतोष जताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध हैं और सरकारी, संसदीय तथा कारोबारी स्तर पर लगातार काम हो रहा है.
रूसी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच बढ़ते कारोबार का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछले साल व्यापार में कुछ कमी आई थी, लेकिन इस साल इसमें फिर बढ़ोतरी हो रही है. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों और भारत-रूस संबंधों पर उनके व्यक्तिगत ध्यान को भी अहम बताया.
दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ने की एक बड़ी वजह रूस से भारत का ऊर्जा आयात भी है. आने वाले महीनों में मोदी-पुतिन की लगातार होने वाली मुलाकातों से दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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