Balochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में वर्षों से जारी मानवाधिकार हनन की घटनाओं पर आखिरकार अब देश के भीतर से भी आवाज़ें उठने लगी हैं. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-पी) के प्रमुख और वरिष्ठ पाकिस्तानी राजनेता मौलाना फजल-उर-रहमान ने एक सभा में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि बलूचिस्तान में सरकारी एजेंसियों द्वारा लोगों को अवैध तरीके से अगवा किया जा रहा है.
खैबर पख्तूनख्वा में आयोजित एक जनसभा के दौरान मौलाना ने कहा कि “पाकिस्तानी आतंकवादी बल लोगों का जबरन अपहरण कर रहे हैं.” यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब बलूचिस्तान में हजारों युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जबरन गुमशुदगी पर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंतर्राष्ट्रीय चिंता
मौलाना फजल के बयान ने न सिर्फ पाकिस्तान के आंतरिक हालात पर ध्यान खींचा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता को भी हवा दी है. अमेरिकी मानवाधिकार वकील और शोधकर्ता रीड ब्रॉडी ने भी बलूच लोगों के लिए अंतर्राष्ट्रीय जवाबदेही की मांग करते हुए स्वतंत्र जांच का आह्वान किया है.
ब्रॉडी ने यह टिप्पणी जिनेवा प्रेस क्लब में आयोजित सातवें बलूचिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान दी, जो कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 60वें नियमित सत्र के साथ आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम का आयोजन बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) द्वारा किया गया.
"दुनिया बलूचिस्तान को अनदेखा नहीं कर सकती"
ब्रॉडी ने कहा, “दुनिया बलूचिस्तान की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं कर सकती. जबरन गुमशुदगियों, गैरकानूनी हत्याओं और महिला कार्यकर्ताओं को धमकाने जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.”
उन्होंने पाकिस्तान सरकार से निम्न मांगें भी रखीं:
बलूच परिवारों की उम्मीदें और जमीनी सच्चाई
बलूचिस्तान की सड़कों पर अब भी दर्जनों परिवार अपनों की तस्वीरें हाथों में लिए विरोध कर रहे हैं. कहीं माताओं की आंखों में आँसू हैं, तो कहीं बहनों की पुकार, "हमें हमारा भाई वापस दो". जहां एक ओर सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठी है, वहीं मौलाना फजल-उर-रहमान जैसे नेताओं का इस विषय पर मुखर होना, इस गंभीर संकट को एक नए मोड़ की ओर ले जा सकता है.
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