अमेरिका से साथ मिलकर ये खतरनाक हथियार बनाने की तैयारी में द. कोरिया, अबतक इन देशों के पास है ये तकनीक

Nuclear Submarines: दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने ऐतिहासिक समझौता किया है. अब दक्षिण कोरिया न्यूक्लियर-संचालित पनडुब्बियां बना सकेगा. व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका तकनीकी सहयोग और परमाणु ईंधन की आपूर्ति करेगा. इससे दक्षिण कोरिया को अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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Nuclear Submarines: दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने ऐतिहासिक समझौता किया है. अब दक्षिण कोरिया न्यूक्लियर-संचालित पनडुब्बियां बना सकेगा. व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका तकनीकी सहयोग और परमाणु ईंधन की आपूर्ति करेगा. इससे दक्षिण कोरिया को अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी.

वर्तमान में केवल अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और भारत के पास ही परमाणु-संचालित पनडुब्बियां हैं. दक्षिण कोरिया के पास अब तक केवल 20 डीज़ल पनडुब्बियां थीं, जिन्हें बार-बार पानी के ऊपर आना पड़ता था. न्यूक्लियर पनडुब्बियां तेज, शक्तिशाली और लंबे समय तक पानी में रह सकती हैं.

ट्रेड डील के बाद रणनीतिक कदम

यह समझौता पिछले महीने हुई अमेरिका-दक्षिण कोरिया ट्रेड डील के बाद आया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दक्षिण कोरिया पर लगाए गए 25% टैरिफ को घटाकर 15% किया, और बदले में दक्षिण कोरिया ने अमेरिका में 350 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया.

उत्तर कोरिया की बढ़ती धमकी के बीच जरूरी कदम

उत्तर कोरिया ने मार्च 2025 में अपनी परमाणु पनडुब्बी की तस्वीरें जारी की थीं. माना जा रहा है कि रूस इसमें मदद कर रहा है. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने APEC सम्मेलन में कहा कि उन्हें उत्तर कोरिया के खतरों का सामना करने के लिए न्यूक्लियर पनडुब्बियों की जरूरत है. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यु-बैक ने कहा, “ये पनडुब्बियां हमारे देश के लिए गौरव होंगी और उत्तर कोरिया के लिए चिंता का कारण बनेगी.”

अमेरिका को भी मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका दक्षिण कोरिया की मदद से उत्तर कोरिया और चीन पर क्षेत्रीय दबाव बढ़ा सकेगा. यह समझौता दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा. ट्रंप ने कहा कि पनडुब्बियां फिलाडेल्फिया में बनेगी, लेकिन दक्षिण कोरिया चाहता है कि निर्माण उनके देश में हो, क्योंकि फिलाडेल्फिया शिपयार्ड पर्याप्त क्षमता नहीं रखता. प्रधानमंत्री किम मिन-सोक ने कहा, “यह शिपयार्ड इस स्तर की पनडुब्बी बनाने में सक्षम नहीं है.” अब दोनों देशों को परमाणु ईंधन की आपूर्ति और तकनीकी समझौते को अपडेट करना होगा.

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