भारत के पड़ोस में चीनी साजिश, इस देश के लोगों की जिंदगी में बो रहा जहर; नरक जैसे हालात में मजदूरों से ले रहा काम

दुनिया के नक्शे पर अगर कोई ऐसा देश है जो आज घुटन और खामोशी के बीच कराह रहा है, तो वह है म्यांमार.

Chinese conspiracy in India neighbourhood myanmar
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik/AI Image

दुनिया के नक्शे पर अगर कोई ऐसा देश है जो आज घुटन और खामोशी के बीच कराह रहा है, तो वह है म्यांमार. बीते चार सालों से चल रहे गृहयुद्ध ने वहां की जनता को जिस मानसिक और शारीरिक त्रासदी में डाला है, वह किसी से छिपी नहीं है. लेकिन इस अराजकता के बीच एक और खामोश जंग चल रही है — खनिजों की लूट और इंसानियत की अनदेखी की जंग.

म्यांमार की धरती दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) से भरपूर है. ये ऐसे खनिज हैं जो आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं — इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ, विंड टर्बाइन, मेडिकल उपकरण, और यहां तक कि अत्याधुनिक हथियारों में भी इनका इस्तेमाल होता है. चीन, जो म्यांमार का पड़ोसी है, इन खजानों पर अपनी पकड़ बनाने के लिए वहां धड़ल्ले से खनन करवा रहा है — लेकिन यह सब एक भारी कीमत पर.

जिंदगी से सस्ता खनिज

खनन स्थलों पर काम करने वाले मजदूर किसी मशीन की तरह ट्रीट किए जा रहे हैं. न दस्ताने, न मास्क, न कोई सुरक्षा गारंटी. म्यांमार की पर्यावरण कार्यकर्ता लाहटाव काई बताती हैं, "वहां सांस लेना भी मुश्किल है. रसायनों की बदबू से हवा जहरीली हो चुकी है, लेकिन मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करने पर मजबूर किया जाता है. बीमार पड़ने पर उन्हें बाहर निकाल दिया जाता है, और उनकी जगह नया मजदूर रख दिया जाता है." यह न केवल मानवीय अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह एक पूरी पीढ़ी के स्वास्थ्य और भविष्य से खिलवाड़ है.

प्रकृति का कत्लेआम

थाईलैंड के मानवाधिकार कार्यकर्ता सेंग ली ने म्यांमार के खनन क्षेत्रों का अध्ययन किया है. वह बताते हैं, "पहले ये पहाड़ हरियाली से भरे होते थे, अब वहां सिर्फ धूल, गड्ढे और लाल पानी की नदियां हैं." खनन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों को खुलेआम नदी-नालों में बहा दिया जाता है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र बर्बाद हो रहा है. गांव के गांव बीमारियों की चपेट में हैं, लेकिन आवाज उठाने वाला कोई नहीं.

चीनी रणनीति या लालच की हदें?

डेलावेयर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जूलीक क्लिंगर के मुताबिक, चीन ने जानबूझकर अपने देश में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का खनन कम कर दिया है ताकि पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़े. लेकिन इसका सीधा असर यह हुआ है कि म्यांमार जैसे अस्थिर देशों में इसका शोषण बढ़ गया है. ग्लोबल विटनेस की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 2021 में म्यांमार से 18,500 टन दुर्लभ मृदा तत्व आयात किए थे, जो 2023 तक बढ़कर 41,700 टन हो गए. यह आंकड़ा दर्शाता है कि खनिजों की यह लूट कितनी तीव्रता से बढ़ रही है.

क्या खो रहा है म्यांमार?

सिर्फ खनिज नहीं जा रहे हैं इस देश से — म्यांमार अपनी सांसें, अपनी मिट्टी, अपनी नदियां और अपने लोगों की अस्मिता खो रहा है. और यह सब उस दुनिया की आंखों के सामने हो रहा है, जो मानवाधिकारों और पर्यावरण संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें करती है.

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