नई दिल्ली: वैश्विक राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने चीन के साथ संभावित सैन्य टकराव के मद्देनजर अपनी रक्षा तैयारियों को तेज कर दिया है. पेंटागन ने देश के प्रमुख हथियार निर्माताओं को 12 महत्वपूर्ण मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन को दोगुना या उससे भी अधिक बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इस कदम के पीछे चीन की रणनीतिक खनिजों की तस्करी पर कड़े नियंत्रण और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का प्रभाव भी माना जा रहा है.
पेंटागन की म्यूनिशन एक्सेलेरेशन रणनीति
पेंटागन ने उत्पादन बढ़ाने के लिए एक विशेष म्यूनिशन एक्सेलेरेशन काउंसिल का गठन किया है. डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फाइनबर्ग इस काउंसिल के तहत हथियार कंपनियों के प्रमुखों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखकर उत्पादन योजना पर चर्चा कर रहे हैं. इस योजना का लक्ष्य आगामी 6, 18 और 24 महीनों में हथियारों के उत्पादन को मौजूदा स्तर से लगभग 2.5 गुना तक पहुंचाना है, ताकि किसी भी संभावित संघर्ष के लिए तैयार रहना संभव हो सके.
किन हथियारों पर है विशेष ध्यान?
पेंटागन ने खास तौर पर पैट्रियट इंटरसेप्टर, लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल, स्टैंडर्ड मिसाइल-6, प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल और जॉइंट एयर-सर्फेस स्टैंडऑफ मिसाइल के उत्पादन पर जोर दिया है. पैट्रियट मिसाइल के उत्पादन को सालाना लगभग 2,000 यूनिट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जो फिलहाल के मुकाबले लगभग चार गुना अधिक है. ये हथियार अमेरिका की काउंटर एयर और मिसाइल डिफेंस क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
उत्पादन में वित्तीय और तकनीकी चुनौतियां
मिसाइल और उच्च तकनीक वाले हथियारों के उत्पादन में भारी लागत और समय लगता है. नई आपूर्ति कंपनियों के लिए मान्यता और क्वालिफिकेशन प्रक्रिया भी लंबी और महंगी होती है, जिसमें कई महीने और करोड़ों डॉलर खर्च हो सकते हैं. पेंटागन को इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन और दीर्घकालिक खरीद समझौते की आवश्यकता होगी, ताकि उत्पादन लक्ष्य को पूरा किया जा सके.
चीन की रणनीतिक तैयारियां
वहीं चीन ने भी अपनी रणनीतिक खनिज सामग्री की तस्करी पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है. ये खनिज रक्षा उपकरणों के निर्माण में आवश्यक होते हैं, इसलिए चीन इस क्षेत्र में अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के प्रयास में है. अमेरिका की उत्पादन वृद्धि के इस कदम से दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है.
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