इजरायल की बलि के बदले शांति पुरस्कार! नोबेल प्राइज के लिए आखिरी पाशा फेकेंगे ट्रंप, क्या बन पाएगी बात?

Donald Trump Nobel Prize: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं, इस बार लक्ष्य है नोबेल शांति पुरस्कार 2025. ट्रंप प्रशासन ने गाजा में जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक नई कूटनीतिक मुहिम शुरू की है, जिसका मकसद सिर्फ शांति नहीं, बल्कि नोबेल की रेस में खुद को सबसे आगे रखना भी है.

Trump will make the final push for the Nobel Prize will things work out
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Donald Trump Nobel Prize: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं, इस बार लक्ष्य है नोबेल शांति पुरस्कार 2025. ट्रंप प्रशासन ने गाजा में जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक नई कूटनीतिक मुहिम शुरू की है, जिसका मकसद सिर्फ शांति नहीं, बल्कि नोबेल की रेस में खुद को सबसे आगे रखना भी है.

व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, 29 सितंबर को एक अहम बैठक बुलाई गई है जिसमें गाजा संघर्ष को लेकर संयुक्त प्रस्ताव पर चर्चा होगी. इस प्रस्ताव को पहले इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास भेजा गया है. यदि नेतन्याहू सहमत होते हैं, तो प्रस्ताव को हमास के पास भेजा जाएगा. डेडलाइन है 1 अक्टूबर क्योंकि 10 अक्टूबर को नोबेल शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा होनी है, और ट्रंप इस मौके से पहले गाजा में संघर्षविराम कराना चाहते हैं.

गाजा से ट्रंप को क्यों है उम्मीद?

अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा पट्टी में 65,000 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं. यूरोप और खाड़ी देशों ने इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया है. चूंकि इज़राइल को अमेरिका का खुला समर्थन प्राप्त है, ऐसे में गाजा में युद्ध रुकवाने की कोशिश को अमेरिका की "शांति पहल" के रूप में देखा जा सकता है. हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था, "अगर ट्रंप गाजा में युद्धविराम कराने में सफल होते हैं, तो नोबेल शांति पुरस्कार उनके नाम तय मानिए." यह बयान जैसे ही सार्वजनिक हुआ, व्हाइट हाउस ने गति पकड़ ली.

क्या ट्रंप वाकई नोबेल के हकदार हैं?

नोबेल शांति पुरस्कार ऐसे व्यक्ति या संस्था को दिया जाता है जिसने राष्ट्रों के बीच भाईचारे को बढ़ावा दिया हो. साथ ही स्थायी सेनाओं को समाप्त करने या कम करने की दिशा में कार्य किया हो. इसके अलावा शांति सम्मेलनों की स्थापना और संवर्धन किया हो. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के सात महीनों में सात युद्धों को रोका. हालांकि, इनमें से कुछ संघर्ष जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, अब भी जारी हैं. गौरतलब है कि कंबोडिया और पाकिस्तान जैसे देशों ने नोबेल पुरस्कार के लिए ट्रंप के नामांकन का समर्थन किया है.

‘यूएन का काम मैं कर रहा हूं’

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान भी ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार की इच्छा जताई थी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, "यूएन जो नहीं कर पाया, वो मैं कर रहा हूं."

क्या यह रणनीति रंग लाएगी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह पहल नोबेल जीतने के लिए आखिरी कोशिश हो सकती है. यदि गाजा में संघर्षविराम सच में 1 अक्टूबर से पहले हो जाता है, तो नोबेल कमेटी पर इसका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है.

हालांकि, कई आलोचकों का मानना है कि मंशा शांति की हो या शोहरत की, असली सवाल यह है कि क्या गाजा के लोगों को वास्तविक राहत मिलेगी या यह केवल राजनीतिक शोर बनकर रह जाएगा.

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