ट्रंप की टैरिफ नीति, चीन का जवाब... ड्रैगन के एक प्रतिबंध ने अमेरिकी किसानों की कैसे बढ़ा दीं मुश्किलें?

Trump Soybean Tariff: अमेरिका की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत को इस बार सबसे छोटे से कारण से झटका लगा है, सिर्फ 0.12 ग्राम वजनी एक सोयाबीन के दाने ने. हाँ, आपने सही सुना! चीन ने अमेरिकी सोयाबीन के आयात पर रोक लगाकर न सिर्फ अमेरिका की ग्रामीण अर्थव्यवस्था बल्कि हजारों किसानों की ज़िंदगी भी मुश्किल में डाल दी है.

China soybean ban burdens America farmers questions on Trump tariff policy
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Trump Soybean Tariff: अमेरिका की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत को इस बार सबसे छोटे से कारण से झटका लगा है, सिर्फ 0.12 ग्राम वजनी एक सोयाबीन के दाने ने. हाँ, आपने सही सुना! चीन ने अमेरिकी सोयाबीन के आयात पर रोक लगाकर न सिर्फ अमेरिका की ग्रामीण अर्थव्यवस्था बल्कि हजारों किसानों की ज़िंदगी भी मुश्किल में डाल दी है.

अप्रैल 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने चीन से आयातित सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिया था, ताकि बीजिंग को व्यापार समझौते के लिए दबाव में लाया जा सके. लेकिन चीन ने इस रणनीति का जवाब देने के लिए सबसे बड़ा कदम उठाया, उसने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद पूरी तरह बंद कर दी. यह कोई मामूली फैसला नहीं था, क्योंकि चीन पिछले वर्षों में अमेरिका का सबसे बड़ा सोयाबीन खरीदार रहा है.

अमेरिकी किसानों का बड़ा नुकसान

मिडवेस्ट के खेतों में रिकॉर्ड 4.5 अरब बुशल की सोयाबीन उगाई गई, लेकिन खरीददार न मिलने से कीमतें नीचे गिर गईं. एक बुशल सोयाबीन की कीमत $10 तक पहुंच गई, जिससे किसान भारी घाटे में चले गए. ट्रंप ने कई बार किसानों को राहत का भरोसा दिया और वित्तीय पैकेज की घोषणा भी की, लेकिन यह उपाय नुकसान को पूरा नहीं कर पाए. किसानों की मुश्किलें बढ़ती गईं और वे कर्ज के बोझ तले दबते गए.

चीन का नया बाजार खोजने का क़दम

चीन ने अमेरिका से सोयाबीन न खरीदकर ब्राजील, अर्जेंटीना और उरुग्वे की ओर रुख किया. ये देश न केवल सस्ते विकल्प हैं, बल्कि चीन के लिए भरोसेमंद सप्लायर भी साबित हो रहे हैं. इससे चीन ने साफ संदेश दिया कि वह किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा और व्यापार युद्ध में वह अपनी रणनीति बदल चुका है.

आर्थिक और राजनीतिक असर

इस विवाद का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिकी जीडीपी में 0.5% से 6% तक की गिरावट आ सकती है, साथ ही मजदूरी कम होने और महंगाई बढ़ने का खतरा भी है. वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर भी घटकर 3% तक आ सकती है.

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की राह

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने चीन पर किसानों को ‘व्यापार वार्ता का बंधक’ बनाने का आरोप लगाया और नए राहत पैकेज का वादा किया. वहीं, अमेरिकी राजनीतिक माहौल में भी ये मामला गरमाता जा रहा है. डेमोक्रेट्स इसे ट्रंप की ‘नाकाम ट्रेड वॉर नीति’ बता रहे हैं और किसानों की नाराजगी बढ़ती जा रही है.

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