बीजिंग: चीन वैश्विक वित्तीय प्रणाली में ‘ऋणदाता महाशक्ति’ के रूप में उभर कर सामने आया है, जहां इसका बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) अब केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम नहीं, बल्कि रणनीतिक वित्तीय उपकरण बन गया है. ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन 2025 तक विकासशील देशों से रिकॉर्ड ₹3 लाख करोड़ की वसूली करेगा, जिसमें से ₹1.9 लाख करोड़ की राशि दुनिया के 75 सबसे गरीब देशों से प्राप्त होगी.
94 लाख करोड़ रुपए का ऋण भार
BRI के तहत बीते एक दशक में जारी किए गए कर्ज की कुल राशि अब ₹94 लाख करोड़ तक पहुंच गई है. इस भारी-भरकम ऋण का भार अनेक विकासशील देशों की सामाजिक संरचनाओं पर स्पष्ट असर डाल रहा है. उदाहरण के लिए, 2023 में 46 निम्न-आय देशों ने अपने टैक्स राजस्व का औसतन 20% सिर्फ कर्ज चुकाने में खर्च किया, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्र सीधे प्रभावित हो रहे हैं.
42 देशों पर GDP से अधिक ऋण
2013 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरू की गई BRI परियोजना में आज 150 देश शामिल हैं, जो वैश्विक GDP का लगभग 40% हिस्सा बनाते हैं. इन देशों में से 42 ऐसे हैं जिनका चीनी कर्ज उनके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 10% से अधिक है, एक संकेतक जो ऋण संकट की गंभीरता को दर्शाता है.
भुगतान संकट और बढ़ता जोखिम
2022 तक चीन द्वारा दिया गया लगभग 60% कर्ज ऐसे देशों को गया है जो पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जबकि 2010 में यह आंकड़ा सिर्फ 5% था. चीन द्वारा दी जाने वाली औसत ब्याज दर 4.2% से 6% के बीच है, जो OECD देशों द्वारा पेश की गई औसत 1.1% दर की तुलना में कहीं अधिक है.
चीन के टॉप कर्जग्रस्त देश और संकट
'ऋण-जाल' रणनीति: 5 प्रमुख लक्षण
विकास सहायता नहीं, व्यावसायिक ऋण: चीन का अधिकांश फंड बाजार दर पर दिया जाता है, कम ग्रेस पीरियड और सख्त शर्तों के साथ. 2017 तक इसके कर्ज का केवल 12% विकास सहायता की श्रेणी में आता था.
प्राकृतिक संसाधनों के बदले कर्ज वसूली: वेनेजुएला, अंगोला जैसे देशों से चीन ने तेल, खनिज और अन्य संसाधनों के बदले ऋण चुकता करवाया है.
अघोषित ऋण मॉडल: कई कर्ज सरकारी एजेंसियों, जॉइंट वेंचर्स या स्पेशल परपज़ व्हीकल्स के माध्यम से दिए गए, जिससे आधिकारिक रिकॉर्ड में पारदर्शिता नहीं है. अनुमान है कि देशों ने GDP के 5.8% के बराबर चीनी देनदारी रिपोर्ट ही नहीं की है.
गैर-पारदर्शिता और भ्रष्टाचार: BRI के 35% प्रोजेक्ट्स भ्रष्टाचार, लागत बढ़ोत्तरी और सामाजिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
रणनीतिक गहराई: चीन अधिकतर निवेश उन देशों में करता है जो प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध, राजनीतिक रूप से अस्थिर या लोकतांत्रिक रूप से कमजोर हैं, जिससे उसका भौगोलिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है.
वैश्विक नीति के लिए एक चेतावनी
चीन का BRI मॉडल वैश्विक विकास सहयोग के लिए एक चुनौतीपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जहां निवेश के पीछे दीर्घकालिक राजनीतिक और रणनीतिक हित छिपे हो सकते हैं. यह विश्व बैंक और IMF जैसे पारंपरिक संस्थानों के समक्ष एक वैकल्पिक लेकिन अनिश्चित मॉडल के रूप में खड़ा है.
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