इस्लामाबाद: पाकिस्तान के आसमान में पिछले करीब 60 घंटे के दौरान चीन और तुर्की के सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही ने ध्यान खींचा है. सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, कई भारी सैन्य परिवहन विमान पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस पर पहुंचे हैं. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन विमानों के जरिए पाकिस्तान को ड्रोन या दूसरे रक्षा उपकरण भेजे गए हैं.
बताया जा रहा है कि चीन के सैन्य परिवहन विमान रावलपिंडी के पास नूर खान एयरबेस और कराची के मसरूर एयरबेस पर पहुंचे. इसी दौरान तुर्की के सैन्य परिवहन विमानों की आवाजाही भी देखी गई. हालांकि, इन विमानों में वास्तव में क्या सामान था, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
60 घंटे में लगातार विमानों की आवाजाही
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि इतने कम समय में भारी सैन्य विमानों का बार-बार पाकिस्तान पहुंचना सामान्य सैन्य गतिविधि से अलग नजर आता है. इसी वजह से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन उड़ानों के जरिए किसी बड़े सैन्य सामान की सप्लाई की गई हो सकती है.
कुछ सूत्रों ने ड्रोन और दूसरे रक्षा उपकरण पाकिस्तान पहुंचाए जाने की बात कही है. हालांकि, अभी तक किसी खास हथियार, ड्रोन के मॉडल या उनकी संख्या की पुष्टि नहीं हुई है.
चीन और पाकिस्तान की पुरानी सैन्य दोस्ती
पाकिस्तान लंबे समय से अपनी सैन्य जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर रहा है. दोनों देशों के बीच लड़ाकू विमान, ड्रोन और वायु रक्षा प्रणाली समेत कई रक्षा क्षेत्रों में सहयोग है.
पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग और चर्चा में आया था. उस दौरान चीन ने भी माना था कि उसकी वायुसेना से जुड़े कर्मियों ने पाकिस्तान को तकनीकी मदद दी थी.
तुर्की के साथ भी बढ़ रहा रक्षा सहयोग
चीन के अलावा पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं. दोनों देश ड्रोन, नौसेना से जुड़े सिस्टम और विमानन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं.
मई में पाकिस्तान के वायुसेना प्रमुख ने तुर्की का दौरा किया था. इस दौरान रक्षा, विमानन, ड्रोन और नई सैन्य तकनीक से जुड़े मुद्दों पर उच्च स्तर की बैठकें हुई थीं.
तुर्की के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 200 पाकिस्तानी इंजीनियर और अधिकारी तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के केएएएन लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं. पाकिस्तान को इस परियोजना में औपचारिक रूप से शामिल करने को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ने की बात सामने आई है.
मक्का रक्षा समझौते से भी जोड़ा जा रहा
चीन और तुर्की के सैन्य विमानों की यह गतिविधि 7 अगस्त को हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के संदर्भ में भी देखी जा रही है. पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. हालांकि, तीनों देशों ने इसे रक्षात्मक समझौता बताया है और किसी खास देश के खिलाफ गठजोड़ से इनकार किया है.
ऐसे में एक तरफ चीन के साथ पाकिस्तान की पुरानी सैन्य साझेदारी और दूसरी तरफ तुर्की के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग इस समय एक साथ नजर आ रहा है. सैन्य विमानों की हालिया आवाजाही ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है.
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