एंटी-एजिंग पर 17 करोड़ सालाना खर्च, अब जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा उद्योगपति, पढ़ें पूरा मामला

दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो उम्र को मात देने के लिए अपनी पूरी जिंदगी विज्ञान के भरोसे जीते हैं. अमेरिकी टेक उद्यमी और बायोहैकर ब्रायन जॉनसन उन्हीं चुनिंदा लोगों में शामिल हैं. वर्षों से वे अपने शरीर को जवान बनाए रखने के लिए बेहद अनुशासित जीवनशैली अपनाते रहे हैं.

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दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो उम्र को मात देने के लिए अपनी पूरी जिंदगी विज्ञान के भरोसे जीते हैं. अमेरिकी टेक उद्यमी और बायोहैकर ब्रायन जॉनसन उन्हीं चुनिंदा लोगों में शामिल हैं. वर्षों से वे अपने शरीर को जवान बनाए रखने के लिए बेहद अनुशासित जीवनशैली अपनाते रहे हैं. सैकड़ों मेडिकल टेस्ट, सख्त डाइट, दर्जनों सप्लीमेंट, नियमित एक्सरसाइज और डॉक्टरों की बड़ी टीम पर हर साल करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) खर्च करने वाले ब्रायन का सपना था कि उम्र बढ़ने की रफ्तार को जितना संभव हो, उतना धीमा किया जाए. लेकिन अब उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने यह साबित कर दिया कि आधुनिक विज्ञान और करोड़ों रुपये का निवेश भी हर बीमारी से सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता.

हाल ही में ब्रायन जॉनसन ने खुद खुलासा किया कि उन्हें ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस (Autoimmune Gastritis-AIG) नाम की एक दुर्लभ बीमारी का पता चला है. फिलहाल इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है. खास बात यह है कि यह बीमारी कई वर्षों तक उनके शरीर में बिना किसी बड़े लक्षण के विकसित होती रही और अत्याधुनिक मेडिकल मॉनिटरिंग के बावजूद देर से सामने आई. इस खुलासे ने हेल्थ और एंटी-एजिंग की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है.

कौन हैं ब्रायन जॉनसन?

48 वर्षीय ब्रायन जॉनसन अमेरिका के जाने-माने टेक उद्यमी हैं. अपनी टेक कंपनी बेचने के बाद उन्होंने पूरी तरह से एंटी-एजिंग रिसर्च और हेल्थ ऑप्टिमाइजेशन पर ध्यान केंद्रित किया. उनका 'ब्लूप्रिंट' प्रोजेक्ट दुनियाभर में चर्चा का विषय बना, जिसमें वे दावा करते रहे कि वैज्ञानिक तरीकों की मदद से इंसान उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को काफी हद तक धीमा कर सकता है.

ब्रायन की दिनचर्या बेहद सख्त मानी जाती है. वे रोज तय समय पर उठते हैं, नियंत्रित भोजन करते हैं, नियमित व्यायाम करते हैं, सैकड़ों सप्लीमेंट लेते हैं और शरीर के लगभग हर अंग की लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग कराते हैं. लंबे समय तक डॉक्टरों और विशेषज्ञों की बड़ी टीम उनकी सेहत पर नजर रखती रही. इसी वजह से उन्हें दुनिया के सबसे चर्चित बायोहैकर्स में गिना जाता है.

कौन-सी बीमारी से जूझ रहे हैं?

ब्रायन जॉनसन ने बताया कि उन्हें ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस (AIG) नाम की बीमारी है. यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से पेट की अंदरूनी कोशिकाओं पर हमला करने लगता है. इसके कारण पेट में एसिड बनने की क्षमता प्रभावित होती है और शरीर आयरन व विटामिन B12 जैसे जरूरी पोषक तत्वों को ठीक तरह से अवशोषित नहीं कर पाता.

समय के साथ मरीज में आयरन की कमी, विटामिन B12 की कमी, एनीमिया और कुछ मामलों में पेट के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई मरीजों में लंबे समय तक इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे बीमारी का पता काफी देर से चलता है.

आखिर कैसे चला बीमारी का पता?

ब्रायन ने बताया कि कई वर्षों से उनके शरीर में फेरिटिन यानी आयरन स्टोर का स्तर लगातार कम हो रहा था. हालांकि बाकी अधिकांश मेडिकल रिपोर्ट सामान्य आ रही थीं, इसलिए डॉक्टरों को इसकी असली वजह समझने में काफी समय लगा. बाद में विशेषज्ञों ने एंडोस्कोपी, ब्लड टेस्ट और पेट की बायोप्सी समेत कई विस्तृत जांच कराईं. इन परीक्षणों में एंटी-पैराइटल सेल एंटीबॉडी का स्तर सामान्य से काफी अधिक पाया गया. बायोप्सी रिपोर्ट ने आखिरकार पुष्टि कर दी कि उन्हें ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस है.

क्या इस बीमारी का इलाज संभव है?

मौजूदा समय में ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है. डॉक्टर मुख्य रूप से इसके प्रभाव को नियंत्रित करने पर जोर देते हैं. मरीज को आयरन और विटामिन B12 की कमी पूरी करनी पड़ती है, साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और पेट के कैंसर की स्क्रीनिंग करानी होती है. ब्रायन जॉनसन का कहना है कि आयरन की दवा लेने के बाद उनकी आयरन की कमी में सुधार हुआ है. हालांकि अब उन्हें जीवनभर नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग करानी होगी ताकि किसी भी संभावित जटिलता का समय रहते पता लगाया जा सके.

विज्ञान की मदद से नई उम्मीद तलाशेंगे

ब्रायन का कहना है कि वे इस बीमारी को अपनी यात्रा का अंत नहीं मानते. उनका इरादा वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के साथ मिलकर ऐसे संभावित उपचारों पर काम करने का है जो भविष्य में इस बीमारी के मरीजों के लिए बेहतर विकल्प बन सकें. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इनमें से कई तकनीकें अभी शुरुआती और प्रयोगात्मक चरण में हैं. उनका मानना है कि स्वास्थ्य विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है और भविष्य में इस बीमारी के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं. इसलिए वे अपने अनुभव और रिसर्च को सार्वजनिक रूप से साझा करते रहेंगे.

2 से 5 प्रतिशत लोगों में हो सकती है यह बीमारी

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ब्रायन जॉनसन ने बताया कि ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस लगभग 2 से 5 प्रतिशत लोगों में पाई जाती है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को वर्षों तक इसका पता ही नहीं चल पाता. उन्होंने कहा कि बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि जिन लोगों में शुरुआती संकेत मौजूद हों, वे समय रहते जांच करवा सकें. उनका कहना है कि वे इस चुनौती से पीछे हटने वाले नहीं हैं और बीमारी को बेहतर ढंग से समझने के लिए लगातार काम करते रहेंगे.

बचपन की आदतों का भी किया जिक्र

ब्रायन ने अपने पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि बचपन में उनकी खानपान की आदतें बिल्कुल स्वस्थ नहीं थीं. वे अक्सर मीठे सीरियल, सॉफ्ट ड्रिंक और जंक फूड का सेवन करते थे. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी मौजूदा बीमारी का इससे कोई सीधा संबंध है या नहीं, लेकिन उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत पर जरूर जोर दिया.

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