बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के एक साल पूरे होने पर मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने देश को संबोधित किया और भावुक अपील के साथ लोकतंत्र की दिशा में अगला रोडमैप जनता के सामने रखा. उन्होंने साफ कर दिया कि देश में 13वें संसदीय चुनाव फरवरी 2026 में कराए जाएंगे. यह फैसला उस दौर में आया है जब बांग्लादेश लंबे समय तक राजनीतिक अनिश्चितताओं और सत्ता संघर्ष से गुजरता रहा है.
अपने राष्ट्र को संबोधित करते हुए यूनुस ने कहा कि उनकी अंतरिम सरकार अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से बहाल करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रही है. उन्होंने ऐलान किया कि फरवरी 2026 में आम चुनाव होंगे और यह प्रयास रमजान से पहले संपन्न कराया जाएगा. उन्होंने कहा, “हम एक निर्वाचित सरकार को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं. जल्द ही मुख्य चुनाव आयुक्त को औपचारिक पत्र सौंपा जाएगा ताकि चुनाव की तैयारियां शुरू की जा सकें.” इस घोषणा के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि देश की अंतरिम सरकार अब सक्रिय रूप से सत्ता को लोकतांत्रिक संस्थाओं को लौटाने के लिए कमर कस चुकी है.
‘जुलाई विद्रोह’ को बताया ऐतिहासिक मोड़
मोहम्मद यूनुस ने अपने संबोधन में जुलाई 2024 में हुए जनविरोध को बांग्लादेश के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ करार दिया. उन्होंने कहा कि इस विद्रोह ने देश के लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने की नींव रखी और लोगों को नई राजनीतिक दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया. यह विद्रोह सिर्फ सत्ता विरोधी आंदोलन नहीं था, बल्कि यह बांग्लादेश के भविष्य को फिर से गढ़ने का अवसर बना.
जनता से की लोकतंत्र के लिए एकजुट होने की अपील
मुख्य सलाहकार यूनुस ने देश के नागरिकों से अपील की कि वे लोकतंत्र को सफल बनाने के लिए अपने मत का सम्मान करें और आगामी चुनावों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें. उन्होंने कहा कि हमें मिलकर एक ऐसा बांग्लादेश बनाना है, जहां सत्ता परिवर्तन जनता की इच्छा से हो, न कि डर, दबाव या हिंसा से. उन्होंने सभी धर्मों और समुदायों से कामना की कि देश में एक शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव संपन्न हो.
निष्पक्ष चुनाव का वादा
अंतरिम सरकार की भूमिका को रेखांकित करते हुए यूनुस ने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि हमारी अंतरिम सरकार हर वह कदम उठाएगी जिससे चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक माहौल में हो. उनका यह भाषण न सिर्फ एक चुनावी ऐलान था, बल्कि देश के नागरिकों के विश्वास को फिर से जीतने की कोशिश भी.
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