Ayodhya क्यों नहीं जाना चाहते राहुल गांधी, कांग्रेस की न्याय यात्रा में रामलला के दर्शन नहीं; जानिए इसके पीछे के फायदे और नुकसान

Ayodhya क्यों नहीं जाना चाहते राहुल गांधी, कांग्रेस की न्याय यात्रा में रामलला के दर्शन नहीं; जानिए इसके पीछे के फायदे और नुकसान

भारत24, नेशनल डेस्क: देश में राम मंदिर की धूम है. सालों की तपस्या के बाद 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर भक्तों के लिए खोला जाएगा. सारी तैयारियां दिन-रात की जा रही हैं. इसी साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं. इसे लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां भी जोरों पर हैं. कांग्रेस पार्टी 14 जनवरी से भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू करेगी. जो मणिपुर की राजधानी इंफाल से बिहार, झारखंड, यूपी होते हुए मुंबई पहुंचेगी. राहुल गांधी का ये दौरा यूपी में 20 दिनों तक चलेगा. लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस समय देश में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली जगह 'अयोध्या और राम मंदिर' को इस यात्रा के रूट में जगह नहीं दी गई है. 

'कांग्रेस धार्मिक तुष्टीकरण की सबसे बड़ी ठेकेदार'

आपको बता दें कि 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम होने जा रहा है. लोकसभा चुनाव में इसे भुनाने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है. दावा किया जा रहा है कि प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए कांग्रेस नेताओं को भी निमंत्रण भेजा गया है. बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस अगर अयोध्या भी जाएगी तो भी कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यूपी में कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं है. कांग्रेस अपनी आखिरी सांसें गिन रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा अयोध्या की उपेक्षा की है. कांग्रेस सदैव धार्मिक तुष्टिकरण की सबसे बड़ी ठेकेदार रही है. कांग्रेस तुष्टीकरण की जननी रही है. कांग्रेस पार्टी ने न तो कभी अयोध्या के लिए कुछ किया है और न ही कुछ करेगी, बल्कि कपिल सिब्बल कांग्रेस की ओर से बाधाएं राम मंदिर के लिए बाधाएं पैदा कर रहे थे.

मुसलमानों को नाराज नहीं करना चाहती कांग्रेस!

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस बहुसंख्यक (हिंदू) की राजनीति करने का मन नहीं बना पा रही है. कांग्रेस के लोग अयोध्या जैसे मुद्दे से पीछे हटते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, अयोध्या ऐसा मुद्दा है कि कांग्रेस चाहती तो उसे फायदा हो सकता था क्योंकि उसके नेता ने राम मंदिर का ताला भी खुलवाया था. कांग्रेस जानती है कि अगर वह ऐसा करेगी तो मुसलमान नाराज हो जायेंगे. 

इस मामले में एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि अब देखने वाली बात यह होगी कि 22 तारीख को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा में कांग्रेस नेता शामिल होते हैं या नहीं और अगर हां तो उनका बयान काफी अहम होगा. उन्होंने कहा कि अब देश में हिंदुओं या यूं कहें कि बहुसंख्यकों को छोड़कर राजनीति नहीं की जा सकती. पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐसी पिच तैयार की है. वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि इसका असर आगामी लोकसभा चुनाव में साफ तौर पर देखा जा सकता है. 

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