Mamata Banerjee birthday ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं. इससे पहले इस राज्य में कोई महिला सीएम नहीं बनी. मायावती की तरह ममता अपने सख्त तेवर के लिए जानी जाती हैं, लेकिन उनमें स्वर्गीय जयललिता की तरह लोच भी है. यही वजह है कि वह वाम दलों के साथ कांग्रेस को भी शिकस्त देने में कामयाब रहीं. आइये जानते हैं उनके बारे में बड़ी बातें.
पिता थे स्वतंत्रता सेनानी, जिद मिली विरासत में
ममता बनर्जी के पिता प्रमिलेश्वर बनर्जी स्वतंत्रता सेनानी थे. वह गलत बात करना और सुनना दोनों पसंद नहीं करते थे. यह वजह है कि जिद और जुझारूपन ममता का विरासत में मिला. पिता शिक्षक थे और उनके पढ़ाए पाठ का असर आज भी ममता बनर्जी के आचरण में दिखता है.
TMC को 13 वर्ष में सत्ता तक पहुंचाया
ममता बनर्जी बेहद जुझारू हैं. वर्ष 1998 में कांग्रेस से नाता तोड़ कर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. इसके बाद सिर्फ 13 वर्षों के भीतर राज्य में दशकों से जमी वाममोर्चा सरकार को चित कर अपनी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया था. यह बहुत कम लोग जानते होंगे कि वह सिर्फ 15 साल की उम्र में यानी 1970 में ही राजनीति में सक्रिय हो गई थीं. यह भी कम लोग जानते होंगे कि 5 जनवरी, 1955 को जन्मीं ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी से अपना करियर शुरू किया था. विवाद के चलते वह कांग्रेस से अलग हो गईं.
क्यों तोड़ा था कांग्रेस से रिश्ता
ममता का कांग्रेस के साथ मतभेद हो गया था. इसके बाद 1 जनवरी 1998 को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीएमसी) बनाने के लिए कांग्रेस छोड़ दी. इसके बाद पार्टी के गठन किया. बताया जाता है कि वर्ष 1997 में ममता की इच्छा थी कि पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करे. ममता के इस प्रस्ताव का प्रणब मुखर्जी ने यह कहकर विरोध किया था कि यह धर्मनिरपेक्षता से समझौता करने जैसा होगा.
एसपी सांसद का पकड़ लिया था कॉलर
ममता बनर्जी जुझारू नेता के साथ-साथ उग्र स्वभाव की भी रही हैं. 11 दिसंबर 1998 को ममता बनर्जी ने कथित तौर पर महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ आवाज उठाने से रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज का कॉलर तक पकड़ लिया था. यहां तक कि उन्हें लोकसभा से बाहर खींच लिया था.
2011 में दिखाई थी ताकत
ममता बनर्जी के जुझारू व्यक्तित्व का नतीजा भी देखने को मिला. 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने 184 सीटों पर जीत हासि की. इसके साथ ही 34 साल पुरानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया.
सोमनाथ चटर्जी को दी थी पटखनी
1984 में 29 वर्षीया ममता बनर्जी ने सीपीआई-एम नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को दक्षिण कोलकाता के जादवपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में 19,660 वोटों से हराया था. यह नतीजा काफी चौंकाने वाला था.
पेंटिंग करना और कविता लिखना है पसंद
ममता बनर्जी ने 2011 में अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और सीपीआई-एम उम्मीदवार नलिनी मुखर्जी को 54,000 से अधिक वोटों से हराया. ममता के बारे में जग जाहिर है कि वह एक साधारण जीवनशैली जीती हैं. वह सिर्फ सूती साड़ी पहनती हैं. ममता को 'मुरी-तेलेभाजा' (मुरमुरे और बंगाली पकौड़े) खाना और लंबी सैर करना भाता है.