Asmatullah Karrar Camp: अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. हाल ही में पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने सीमा पार अफगान इलाके में स्थित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के एक बड़े आतंकी ठिकाने पर हवाई हमला कर उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया है. यह ऑपरेशन शनिवार को दिन के उजाले में अंजाम दिया गया, जिसे सेना ने “ब्रॉड डेलाइट एरियल ऑफेंसिव” का नाम दिया है.
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, अफगान क्षेत्र में स्थित आसमतुल्लाह कर्रार कैंप को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गईं. इस कैंप को लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना का मुख्य अड्डा माना जाता रहा है. ऑपरेशन के दौरान दर्जनों आतंकियों के मारे जाने का दावा भी किया गया है.
कर्रार कैंप: आतंक की फैक्ट्री
पाकिस्तानी खुफिया सूत्रों के अनुसार, यह कैंप न सिर्फ TTP बल्कि कुछ हद तक अफगान तालिबान से भी जुड़ा हुआ था. बताया जा रहा है कि यहां से बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पेशावर जैसे इलाकों में होने वाले आतंकी हमलों की रणनीति तैयार होती थी. इस कैंप में बड़ी मात्रा में अमेरिकी हथियार भी मौजूद थे, वे हथियार जो 2021 में अमेरिकी फौज की वापसी के बाद अफगान तालिबान के कब्जे में आ गए थे.
जमीन पर भी दिखा पाकिस्तान का आक्रामक रुख
हवाई हमले के बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके जमीनी बलों ने सीमा के उस पार 21 अफगान चौकियों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है. इसके साथ ही तालिबान के कई लड़ाकों को गिरफ्तार करने और 12 से अधिक अमेरिकी Humvees जब्त करने की भी जानकारी दी गई है.
कौन था आसमतुल्लाह कर्रार?
कर्रार TTP का एक वरिष्ठ और कुख्यात कमांडर था. वह पाकिस्तान में आत्मघाती हमलों, सुरक्षाबलों पर हमलों और सीमा पार आतंकवाद का मास्टरमाइंड माना जाता था. पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान से उसकी गिरफ्तारी या कार्रवाई की मांग करता आ रहा था, लेकिन अफगान शासन की चुप्पी से पाकिस्तान में असंतोष था.
तालिबान में नाराज़गी, पलटवार की संभावना
हालांकि अफगान तालिबान की ओर से अभी तक इस हमले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन काबुल, कंधार और अन्य हिस्सों में विरोध के सुर तेज हो गए हैं. तालिबान समर्थकों और कुछ स्थानीय नागरिकों ने इस हमले को “अफगान संप्रभुता पर हमला” करार दिया है. सोशल मीडिया पर कई तालिबान समर्थक खातों ने चेतावनी दी है कि इसका “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा.
शहबाज शरीफ की आक्रामक रणनीति
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही साफ कर चुके हैं कि पाकिस्तान अब सीमा पार आतंकी ठिकानों को बर्दाश्त नहीं करेगा. उनके अनुसार, सरकार अब एक नई सीमा सुरक्षा नीति अपना रही है, जिसमें बॉर्डर फेंसिंग को और सख्त करना, ड्रोन निगरानी बढ़ाना और अफगान शरणार्थियों की वापसी तेज करना शामिल है. अब तक 42,000 से अधिक अफगानों को पाकिस्तान से वापस अफगानिस्तान भेजा जा चुका है.
अंतरराष्ट्रीय नजरें और संभावित खतरा
अमेरिका और चीन जैसे देश इस घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव और बढ़ा, तो यह पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है.
इस बीच, सीमा पर तनाव का माहौल बना हुआ है. चमन और स्पिन बोल्डक जैसे संवेदनशील इलाकों में सेना और नागरिकों की हलचल तेज हो गई है. दोनों पक्षों ने अपनी सीमाओं पर तैनाती और निगरानी को बढ़ा दिया है.
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