तालिबान के नेता की हत्या और कांधार में सत्ता परिवर्तन... पाकिस्तान किसकी शह पर अफगानिस्तान को बना रहा निशाना?

Pakistan Taliban Clash: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच का टकराव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. अफगानिस्तान के दक्षिणी प्रांत कंधार के खोराबाक क्षेत्र में हाल ही में दोनों देशों की सेनाओं के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई है.

assassination Taliban leaderchange of power in Kandahar instigation Pakistan targeting Afghanistan
Image Source: Social Media/X

Pakistan Taliban Clash: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच का टकराव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. अफगानिस्तान के दक्षिणी प्रांत कंधार के खोराबाक क्षेत्र में हाल ही में दोनों देशों की सेनाओं के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने अफगान सीमा पार कर खोराबाक में सैन्य कार्रवाई की, जिसके जवाब में तालिबान लड़ाकों ने मोर्चा संभाल लिया और सीधा जवाबी हमला किया. इस घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है.

खोराबाक, कंधार का एक अहम इलाका है जो पाकिस्तान की सीमा से काफी भीतर स्थित है. ये क्षेत्र इसलिए भी संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यहीं तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंजदा का निवास स्थान बताया जाता है. तालिबान शासन के तहत कंधार को ‘शक्ति का केंद्र’ माना जाता है, जहां सुरक्षा व्यवस्था अत्यधिक कड़ी रहती है. ऐसे में पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाई को केवल एक सैन्य हमला नहीं, बल्कि तालिबान शासन की राजनीतिक जड़ों को निशाना बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट, दोनों पक्षों में सीधी भिड़ंत

अफगान न्यूज एजेंसी खामा प्रेस के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से की गई इस घुसपैठ और सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए तालिबान के लड़ाकों ने सीधा मोर्चा खोल दिया. दोनों पक्षों में भीषण झड़प हुई, जिसकी पुष्टि कुछ स्थानीय सूत्रों ने की है. हालांकि, अभी तक इस झड़प में हताहतों या नुकसान की विस्तृत जानकारी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है.

क्या कंधार पर हमला तालिबान को कमजोर करने की रणनीति है?

इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पाकिस्तान तालिबान शासन को अस्थिर करने के लिए अब उसकी राजनीतिक राजधानी कंधार पर दबाव बनाना शुरू कर चुका है. इससे पहले पाकिस्तान ने काबुल में भी एयर स्ट्राइक की थी, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के प्रमुख नूर वली महसूद को निशाना बनाकर की गई थी. इस कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान ने जवाबी हमला करते हुए पाकिस्तानी सेना के 58 जवानों को मार गिराने का दावा किया था, जिससे पाकिस्तान में चिंता की लहर दौड़ गई थी.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का इशारा

13 अक्टूबर को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें भले ही 'तख्तापलट' शब्द का सीधा इस्तेमाल नहीं किया गया, लेकिन संकेत स्पष्ट थे. पाकिस्तान ने कहा कि अफगानिस्तान में तब तक स्थिरता नहीं आएगी, जब तक वहां पर 'लोकतांत्रिक और प्रतिनिधित्व वाली सरकार' स्थापित नहीं होती.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहा कि तालिबान सरकार अत्याचारी हो गई है और अब अफगानिस्तान से रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे. उनका बयान संकेत देता है कि पाकिस्तान तालिबान सरकार के नेतृत्व पर भरोसा नहीं कर पा रहा.

“पाकिस्तान खुद आतंकवाद का गढ़”

पाकिस्तान की ओर से तालिबान पर लग रहे आरोपों को अफगानिस्तान ने सिरे से खारिज किया है. तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि पाकिस्तान खुद अपने यहां आतंकी संगठनों को संरक्षण देता है, और अब अफगानिस्तान को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है.

तालिबान का कहना है कि पाकिस्तानी सेना की सीमा पार कार्रवाई न केवल संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि यह द्विपक्षीय रिश्तों को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक कदम हो सकता है.

पाकिस्तान का आरोप, TTP को अफगान धरती से समर्थन

पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को अफगानिस्तान से ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक सपोर्ट मिल रहा है. पाकिस्तान का दावा है कि TTP के कई शीर्ष नेता और लड़ाके अफगान क्षेत्रों में छिपे हुए हैं और वहीं से पाकिस्तान में हमलों की योजना बना रहे हैं. TTP को लेकर पाकिस्तान की चिंता नई नहीं है, लेकिन हालिया हमलों ने सेना और सरकार दोनों को सक्रिय सैन्य जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया है.

कंधार की सुरक्षा में सेंध, तालिबान की ताकत पर सवाल

कंधार को तालिबान की राजनीतिक और धार्मिक राजधानी माना जाता है. यही वजह है कि यहां की सुरक्षा व्यवस्था अन्य प्रांतों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होती है. अगर पाकिस्तान ने वाकई इस क्षेत्र में घुसपैठ करके सैन्य कार्रवाई की है, तो यह न केवल तालिबान की सुरक्षा रणनीति पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि पाकिस्तान अब टकराव की नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है.

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडरा रहा खतरा

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हालात अब केवल सीमित सीमा संघर्ष तक नहीं रहे. काबुल और कंधार जैसे बड़े शहरों में कार्रवाई इस बात का संकेत हैं कि दोनों देशों के बीच स्थिति तेजी से खुले युद्ध की ओर बढ़ सकती है. यह टकराव न केवल दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता, बल्कि चीन, ईरान, रूस और अमेरिका जैसे वैश्विक हितधारकों की रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है.

यह भी पढ़ें- यूपी में अब होमगार्ड भर्ती के लिए ये लोग नहीं कर सकेंगे आवेदन, योगी सरकार ने बदले नियम