Amit Shah Bihar Visit: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी में भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से सक्रिय हो चुकी है, और अब पार्टी की सबसे बड़ी चुनावी ताकत, अमित शाह मैदान में उतर चुके हैं. इस महीने दो दौरों पर बिहार आने वाले पूर्व भाजपा अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एजेंडा इस बार थोड़ा अलग है.
इस बार न तो सीट बंटवारे की बात होगी, न ही उम्मीदवारों की घोषणा, शाह इस बार पार्टी संगठन को धार देने और एनडीए में बेहतर समन्वय के लक्ष्य से बिहार दौरे पर हैं.
दो फेज़, दो हिस्सों में संवाद
अमित शाह का यह दौरा महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का पहला ठोस कदम माना जा रहा है. वह बिहार को दो हिस्सों में बांटकर भाजपा संगठनात्मक जिलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे.
इस दौरान शाह 20-20 जिलों के पार्टी नेताओं से अलग-अलग बैठकों में बात करेंगे, जिसमें सांसद, विधायक, विधान पार्षदों के अलावा ज़िला और मंडल स्तर के संगठन पदाधिकारी भी शामिल होंगे.
पहला पड़ाव, सासाराम और बेगूसराय
अमित शाह 18 सितंबर को दो अहम क्षेत्रों में होंगे:
सासाराम (ललन सिंह स्टेडियम, डेहरी-ऑन-सोन):
यहां रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर, गया (पूर्वी-पश्चिमी), जहानाबाद, अरवल, नवादा और औरंगाबाद के भाजपा नेताओं से संवाद होगा.
बेगूसराय (रिफाइनरी टाउनशिप खेल मैदान):
इस बैठक में पटना महानगर, पटना ग्रामीण, बाढ़, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, जमुई, लखीसराय और खगड़िया के संगठन पदाधिकारी शामिल होंगे.
सीट बंटवारे से दूर, समन्वय और प्रदर्शन पर नजर
सूत्रों की मानें तो शाह इस बार सीट बंटवारे या प्रत्याशियों के नामों पर कोई चर्चा नहीं करेंगे. हालांकि, वह वर्तमान विधायकों के प्रदर्शन की रिपोर्ट ज़रूर लेंगे और संगठन के फीडबैक को गंभीरता से नोट करेंगे.
एनडीए सहयोगी दलों के बीच पैदा हुई हल्की खटपट, जैसे जीतन राम मांझी की सीटों को लेकर नाराज़गी पर भी वह भाजपा नेताओं से चर्चा करेंगे, लेकिन यह बातचीत पर्दे के पीछे होगी, किसी औपचारिक एजेंडे का हिस्सा नहीं.
फोकस में ‘जनता से जुड़ाव’ और ‘गठबंधन में समन्वय’
अमित शाह की इन बैठकों में प्रमुख एजेंडा यह रहेगा कि भाजपा नेता राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक कैसे बेहतर तरीके से पहुंचाएं. इसके अलावा, गठबंधन सहयोगियों के साथ मजबूत समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए जाएंगे. पार्टी इस बार हर विधानसभा क्षेत्र को माइक्रो-मैनेज कर रही है और शाह उसी ब्लूप्रिंट को जमीन पर उतारने की कोशिश में हैं.
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