Iran protests 2026: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि किसी भी समय सैन्य टकराव हो सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी तक ईरान पर हवाई हमले को लेकर अंतिम निर्णय नहीं ले पाए हैं, लेकिन स्थिति तेजी से बदल रही है.
इस पूरे मामले में दो अहम लोगों की भूमिका मानी जा रही है, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर. ये दोनों जिनेवा में होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत का नेतृत्व करेंगे. इस बातचीत के आधार पर ही ट्रंप तय करेंगे कि ईरान परमाणु समझौते को लेकर गंभीर है या केवल समय हासिल करने की कोशिश कर रहा है.
जिनेवा वार्ता और संभावित अगला कदम
बताया जा रहा है कि इस हफ्ते ईरान अपना नया प्रस्ताव पेश कर सकता है और गुरुवार को जिनेवा में बातचीत का अंतिम दौर हो सकता है. अगर इस बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है, तो अमेरिका पहले सीमित हवाई हमले पर विचार कर सकता है. यदि सीमित कार्रवाई से भी हालात नहीं सुधरे, तो बड़े स्तर पर एयरस्ट्राइक या यहां तक कि ईरान में सत्ता परिवर्तन जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है.
ट्रंप ने सैन्य विकल्पों पर ली जानकारी
राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में कई बार सैन्य विकल्पों को लेकर ब्रीफिंग ली है. इस दौरान उनके साथ कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन, चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड शामिल हैं.
उपराष्ट्रपति वेंस ने हमले के पक्ष और विपक्ष दोनों पहलुओं पर चर्चा की है. वहीं, जनरल डैन केन ने संभावित जोखिमों को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अमेरिका के पास एंटी-मिसाइल सिस्टम का स्टॉक सीमित है.
पिछले साल जब अमेरिका ने ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज जैसे परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब जवाबी हमलों से बचाव के लिए करीब 30 पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ा था.
ईरान का सख्त रुख
इस बार ईरान ने पहले से ज्यादा सख्त रुख अपनाया है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने चेतावनी दी है कि उनका देश अमेरिकी युद्धपोत को भी निशाना बना सकता है.
बातचीत में सबसे बड़ा विवाद परमाणु संवर्धन को लेकर है. अमेरिका चाहता है कि ईरान इसे पूरी तरह बंद कर दे, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ कर दिया है कि उनका देश संवर्धन रोकने को तैयार नहीं है.
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैयारी
संभावित सैन्य कार्रवाई को देखते हुए अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. यह तैनाती 2003 के इराक युद्ध के बाद सबसे बड़ी मानी जा रही है. अमेरिका का विमानवाहक पोत USS Gerald Ford जल्द ही क्षेत्र में पहुंचने वाला है.
इसके अलावा F-35 और F-22 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान, बॉम्बर और एयर-टू-एयर फ्यूलिंग विमान पहले से ही तैनात किए जा चुके हैं. इस तैयारी के साथ अमेरिका के पास सीमित हमले से लेकर बड़े पैमाने की एयरस्ट्राइक तक सभी विकल्प खुले हैं.
आगे क्या हो सकता है
अब पूरी दुनिया की नजर जिनेवा में होने वाली बातचीत पर टिकी है. अगर बातचीत सफल होती है, तो तनाव कम हो सकता है. लेकिन अगर बातचीत विफल रही, तो अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और गंभीर रूप ले सकता है. आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मामला कूटनीति से सुलझेगा या फिर सैन्य कार्रवाई की दिशा में बढ़ेगा.
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