नई दिल्ली/तेल अवीव: भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग एक बार फिर सुर्खियों में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित इजरायल दौरे से पहले वहां की ओर से बड़ा संकेत मिला है. इजरायल ने भारत को अपने बेहद चर्चित एयर डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ की तकनीक साझा करने का प्रस्ताव दिया है. अगर यह डील आगे बढ़ती है, तो भारत की सुरक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है.
इजरायल में भारत के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच के अनुसार, दोनों देश अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, भारत में मैन्युफैक्चरिंग और आधुनिक रक्षा प्रणालियों पर सहयोग शामिल है.
उन्होंने कहा कि भारत को अब एक उभरती हुई वैश्विक ताकत के रूप में देखा जा रहा है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार गहरी हो रही है. पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान रक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीति से जुड़े कई अहम समझौते होने की संभावना जताई जा रही है.
नया रणनीतिक गठबंधन बनाने की कोशिश
इजरायल सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों के देशों के साथ मिलकर एक नया रणनीतिक समूह बनाने की कोशिश कर रहा है. इसमें अब्राहम अकॉर्ड्स से जुड़े देश, कुछ अफ्रीकी देश, साथ ही ग्रीस और साइप्रस भी शामिल बताए जा रहे हैं.
इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते कट्टरपंथी खतरों से निपटना है. इजरायल का मानना है कि भारत इस रणनीतिक ढांचे में अहम भूमिका निभा सकता है.
क्यों खास है आयरन डोम सिस्टम?
आयरन डोम एक अत्याधुनिक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे खासतौर पर कम दूरी के रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने के लिए बनाया गया है. इसे इजरायल की प्रमुख रक्षा कंपनियों ने मिलकर विकसित किया है.
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है. इजरायल का दावा है कि यह लगभग 90 प्रतिशत हमलों को सफलतापूर्वक रोक सकता है. यह रडार के जरिए खतरे की पहचान करता है और फिर ‘तमीर इंटरसेप्टर’ मिसाइलों से उसे नष्ट कर देता है.
खास बात यह भी है कि यह सिस्टम हर आने वाले खतरे का आकलन करता है और अगर वह किसी गैर-आबादी वाले इलाके में गिरने वाला हो, तो उसे इंटरसेप्ट नहीं करता इससे लागत भी बचती है.
लागत और चुनौतियां
आयरन डोम जितना प्रभावी है, उतना ही महंगा भी है. इसकी एक बैटरी में रडार, कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर शामिल होते हैं, जिसमें कई इंटरसेप्टर मिसाइलें लगी होती हैं.
एक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करीब 40 से 50 हजार डॉलर तक बताई जाती है, जबकि पूरे सिस्टम की एक बैटरी की कीमत लगभग 100 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. ऐसे में भारत को इस सिस्टम को अपनाने से पहले लागत और जरूरत का संतुलन देखना होगा.
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