अमेरिका ने टॉयलेट पेपर जैसे इस्तेमाल किया... पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा खुलासा, जानें क्या कहा

Khawaja Asif Statement: पाकिस्तान की स्थिति ना घर की है और ना ही घाट की. अमेरिका के साथ निकटता बढ़ाने में लगा पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के ताजा बयान ने शहबाज-मुनीर की स्थिति को बेनकाब कर दिया है.  

America Pakistani Defense Minister Khawaja Asif big revelation know what he said
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Khawaja Asif Statement: पाकिस्तान की स्थिति ना घर की है और ना ही घाट की. अमेरिका के साथ निकटता बढ़ाने में लगा पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के ताजा बयान ने शहबाज-मुनीर की स्थिति को बेनकाब कर दिया है.  उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने हितों के लिए पाकिस्तान को इस्तेमाल किया और फिर उसे टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ जंगों में शामिल होने का खामियाजा पाकिस्तान को झेलना पड़ा. 

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत से मार खाने के बाद पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शरण में गए थे. इसके बाद ऐसी कई तस्वीरें भी सामने आई, जिसको देखकर यह साफ लगने लगा कि शहबाज और मुनीर, ट्रंप की चमाचगिरी में लगे हुए हैं. ट्रंप को खुश करने के लिए शहबाज शरीफ ने तो उनके लिए नोबेल पीस प्राइज की भी मांग कर दी थी. 

ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा?

ख्वाजा आसिफ ने 1999 में अफगानिस्तान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने पर भी अफसोस जताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका का समर्थन इसलिए किया था क्योंकि उन्हें वॉशिंगटन का समर्थन मिले. लेकिन ये फैसला पाकिस्तान के लिए तबाही के समान रहा. 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने संसद में बोलते हुए अमेरिका के साथ रिश्तों और उसके असर को लेकर कड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि साल 1999 के बाद एक बार फिर अमेरिका के साथ खड़े होने का फैसला पाकिस्तान के लिए बहुत महंगा साबित हुआ. उनके मुताबिक, उस दौर के फैसलों का बोझ देश आज तक ढो रहा है और पूरी तरह उससे उबर नहीं पाया है.

पूर्व सैन्य शासकों पर लगाए गंभीर आरोप

उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासकों जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि इन नेताओं ने देश को ऐसी लड़ाइयों में झोंक दिया, जिनका पाकिस्तान से सीधा कोई लेना-देना नहीं था. रक्षा मंत्री का कहना था कि इन फैसलों की वजह से देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

संसद में अपने बयान के दौरान उन्होंने बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि पाकिस्तान को बड़े देशों ने जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया और काम निकलने के बाद बेरहमी से अकेला छोड़ दिया. उनका इशारा इस ओर था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान के साथ दोहरे मापदंड अपनाए गए.

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