वाशिंगटनः आज की जंग हथियारों से नहीं, तकनीक से लड़ी जा रही है. दुनिया की महाशक्तियों के बीच अब यह मुकाबला केवल शक्ति प्रदर्शन का नहीं, बल्कि ‘कौन कितनी एडवांस टेक्नोलॉजी रखता है’ इस पर टिक गया है. अमेरिका, चीन और रूस जैसी ताकतवर सेनाएं अब ऐसे फाइटर जेट्स पर फोकस कर रही हैं जो दुश्मन को नज़र तक न आएं – यानी स्टील्थ तकनीक वाले 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स.
जहां अमेरिका के पास F-35 और F-22 जैसे दो अल्ट्रा-मॉडर्न फाइटर जेट्स हैं, वहीं चीन और रूस भी अपने जेट्स के ज़रिए इस दौड़ में टिके हुए हैं. भारत ने भी AMCA प्रोग्राम के तहत इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है. इसी कड़ी में आज बात करेंगे अमेरिका के सबसे खतरनाक और गोपनीय लड़ाकू विमान – F-22 Raptor – की, जिसे अमेरिका ने दुनिया से छिपा रखा है.
F-22 Raptor: हवा में बादशाहत का प्रतीक
F-22 रैप्टर अमेरिका का पहला 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है जिसे लॉकहीड मार्टिन और बोइंग ने मिलकर तैयार किया. इसकी पहली उड़ान 1997 में हुई थी और इसे 2005 में अमेरिकी वायुसेना में शामिल किया गया. इस विमान को मुख्यतः हवाई वर्चस्व (Air Superiority) के लिए डिज़ाइन किया गया है, यानी यह हवा में किसी भी दुश्मन फाइटर को मात देने की क्षमता रखता है.
क्या बनाता है F-22 को खास?
F-22 बनाम F-35: कौन बेहतर?
F-22 को कोई देश क्यों नहीं खरीद सकता?
1998 में अमेरिकी कांग्रेस ने कानून बनाकर F-22 के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया. इसकी वजह थी – इसकी अल्ट्रा-गोपनीय स्टील्थ और एवियोनिक्स टेक्नोलॉजी. अमेरिका नहीं चाहता कि यह तकनीक किसी भी सूरत में प्रतिद्वंद्वी देशों के हाथ लगे. जापान, इज़रायल और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इसे खरीदने की पेशकश की थी, लेकिन हर बार मना कर दिया गया.
2018 में जापान को F-22 और F-35 का हाइब्रिड मॉडल देने का प्रस्ताव आया था, लेकिन अत्यधिक लागत और सुरक्षा कारणों से वो भी रद्द हो गया. इसके उलट F-35 को अमेरिका ने कई सहयोगी देशों को बेचा है क्योंकि यह कम खर्चीला है और एक्सपोर्ट के लिए खास डिज़ाइन किया गया है.
भारत का AMCA प्रोग्राम: अब हमारी बारी
भारत ने भी अब 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट विकसित करने की योजना तेज कर दी है – AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft). यह भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में लाएगा, जिनके पास अपनी 5th जेनरेशन फाइटर टेक्नोलॉजी है. हालांकि इसमें अभी समय लगेगा, लेकिन यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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